
इंदौर।श्रमण संस्कृति के महाश्रमण मुनि पुंगव। श्री सुधा सागर जी महाराज ने आज मंगलवार को दलाल बाग स्थित देशना मंडप में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अतीत में हुए पापों पर अहंकार नहीं पश्चाताप करें।
भविष्य की चिंता में निष्क्रिय नहीं, पुरुषार्थी बने। नियम सुविधा के लिए नहीं, आत्मा की रक्षा के लिए होना चाहिए। मंदिर में दूसरों के दोष नहीं अपने दोष दिखाई देना चाहिए। मंदिर में एवं अपने गुणों का प्रदर्शन नहीं, विनय और आत्मशुद्धि का भाव होना चाहिए।
अंततः प्रत्येक श्रावक को स्वयं से पूछना चाहिए कि क्या मेरे जीवन में ऐसा कोई नियम है, जिसे तोड़ने की कल्पना मात्र से मेरी आत्मा काँप उठे?”
यदि इस प्रश्न का उत्तर तुम्हारे भीतर से “हाँ” आने लगे, तो समझिए कि धर्म केवल हमारे शब्दों में नही बल्कि हमारे जीवन और आचरण में उतर रहा है। प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू ने बताया कि धर्मसभा चक्रवर्ती आकाश आलोक कोल आनंद नवीन गोधा अशोक डोशी, हर्ष जैन, प्रिंसपाल टोंग्या,संजय पाटोदी, सौरभ बड़जात्या, प्रदीप बड़जात्या, शरद पानोत, मयंक जैन, भूपेंद्र भोपाली, विजय कासलीवाल, पंडित अर्पित वाणी मुक्ता जैन सोनाली बगड़िया रानी डोषी आदि बड़ी् संख्या में समाजजन उपस्थित थे।