मानवता, संवेदनशीलता और सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया

रतनलाल कुमावत के नेत्रदान की सूचना प्रातः 4:00 बजे परिवार ने दी

रतलाम। मानव सेवा का सर्वोच्च स्वरूप नेत्रदान है, जो मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उजाला भर देता है। शास्त्री नगर निवासी रतनलाल पिता मयाराम कुमावत (चौधरी) उम्र 80 वर्ष की बीमारी के बाद निधन के पश्चात तत्काल परिवार सदस्य सुपुत्र राधेश्याम, मुकेश, बहन शांता मारू, लक्ष्मी मारू, पोत्र आशीष और वेदांत में नेत्रदान करने का निर्णय लिया और समाज के सामने मानवता, संवेदनशीलता और सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके इस पुनीत कार्य से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
उनके निधन के पश्चात परिजनों ने परिवार के मुखिया से मिली इस महान सेवा कार्य की प्रेरणा को साकार करने के लिए काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविन्द काकानी को दी गई, जिन्होंने नेत्रम संस्था के संस्थापक हेमन्त मूणत को जानकारी देते हुए बताया कि परिजनों की सहमति मिल गई है टीम को सूचित कर दे| गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को सूचना दी गई। उनकी टीम के सदस्य मनीष तलाच एवं परमानंद राठौड़ ने तत्परता से पहुँचकर नेत्र (कार्निया) संरक्षण की प्रक्रिया को पूर्ण किया।
नेत्रदान की इस प्रक्रिया के दौरान परिवारजनों के साथ-साथ समाजजन मोहनलाल मारू, राधेश्याम मारु, श्याम कुमावत ,गोपाल पांचाल , हेमन्त मूणत, शलभ अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, गिरधारीलाल वर्धानी, , भगवान ढलवानी सहित अनेक रिश्तेदार, मित्र साथियों को शास्त्री नगर के पूर्व क्षेत्रीय पार्षद गोविंद काकानी ने बाबूजी के जीवन की मजदूर से लेकर वरिष्ठ ठेकेदार बनने तक, शास्त्री नगर मंदिर के नवीन स्वरूप में सहयोग की जानकारी से अवगत करवाया |नेत्रदान एवं देहदान की जानकारी मीनू माथुर द्वारा दी गई | उपस्थित लोगों ने स्वयं कार्निया संरक्षण की प्रक्रिया को देखा, इससे जुड़ी भ्रांतियों को समझा तथा भविष्य में नेत्रदान करने का संकल्प भी लिया।
इस अवसर पर काकानी शोशल वेलफेयर एवम नेत्रम संस्था द्वारा दिवंगत के परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मान किया गया।
नेत्रम संस्था ने समाज के सभी नागरिकों से भावपूर्ण अपील करते हुए बताया कि नेत्रदान हेतु संस्था हर समय, 24×7 सेवा के लिए उपलब्ध है, ताकि किसी भी समय प्राप्त होने वाली सूचना पर त्वरित रूप से नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कर अधिक से अधिक जरूरतमंदों को दृष्टि प्रदान की जा सके।
नेत्रदान — मृत्यु के बाद भी जीवन देने का श्रेष्ठ माध्यम है।