लेखक: पंकज व्यास
भारत एक ऐसा लोकतांत्रिक देश है जिसकी नींव ‘संभाव’ और ‘समानता’ पर टिकी है। हमारे राष्ट्र की दो सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं—हमारा संविधान और हमारा तिरंगा। ये दोनों ही भारत की आत्मा हैं। जहाँ संविधान हमें नागरिक होने का अधिकार और कर्तव्य सिखाता है, वहीं तिरंगा हमें एक सूत्र में पिरोकर राष्ट्रभक्ति का अहसास कराता है।
संविधान: राष्ट्र का मार्गदर्शक
हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। यह केवल नियमों की किताब नहीं, बल्कि हर भारतीय की सुरक्षा और सम्मान की गारंटी है। “सबसे बड़ा विधान संविधान” कहना इसलिए सार्थक है क्योंकि यह देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से लेकर अंतिम पंक्ति के नागरिक तक, सबको एक समान न्याय और अवसर प्रदान करता है। संविधान ही वह शक्ति है जो हमें लोकतंत्र की असली परिभाषा से परिचित कराती है।
तिरंगा: हमारी सर्वोच्च पहचान
आसमान की ऊंचाइयों को छूता हमारा राष्ट्रध्वज भारत के शौर्य और शांति का संदेश देता है। “तिरंगे से बड़ा न कोई निशान” क्योंकि यह वह ध्वज है जिसके नीचे जाति, धर्म और भाषा की तमाम दीवारें गिर जाती हैं। केसरिया त्याग का, सफेद सच्चाई का और हरा रंग हमारी धरती की खुशहाली का प्रतीक है। यह तिरंगा हमें उन वीरों की याद दिलाता है जिन्होंने इसके सम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
हमारा दायित्व
एक सजग नागरिक के रूप में हमारा यह कर्तव्य है कि हम संविधान के नियमों का पालन करें और तिरंगे की गरिमा पर कभी आंच न आने दें। राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर या सामान्य दिनों में भी, यदि हमें कहीं राष्ट्रध्वज का अनादर होते दिखे, तो उसे रोकना हमारा परम धर्म है।
याद रखें, जब तक हमारा संविधान सुरक्षित है और हमारा तिरंगा शान से फहरा रहा है, तब तक भारत की एकता और अखंडता अक्षुण्ण है। आइए, हम सब मिलकर अपने इन राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें।