पाप के शमन के लिए भक्ति करना चाहिए – स्वामी देव स्वरूपानंद महाराज

अखंड ज्ञान आश्रम में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा आज से प्रारम्भ

रतलाम। किर्तन कई प्रकार के होते हैं यदि मानव किसी ग्रंथ को पढ़ता है, संतों का सत्संग करता है तो वह भी किर्तन का ही एक स्वरूप है वही भक्ति, ज्ञान वैराग्य का स्वरूप् हे संतो का सत्संग भी कीर्तन का ही स्वरुप है स्वाध्याय ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत आता है। यह बात अनंत विभूषित आचार्य महामंडलेश्वर चित्रकूट पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज के सानिध्य में व श्री स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के तृतीय निर्वाण दिवस के अवसर पर सैलाना बस स्टैंड क्षेत्र स्थित अखंड ज्ञान आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिन कथा व्यास स्वामी देव स्वरूपानंद महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों के पठन-पाठन को भी ज्ञान यज्ञ कहते हैं जीवन ब्रह्म की एकता ज्ञान यज्ञ कहलाती है जो व्यक्ति धर्म के विपरीत कार्य करता है वह पाप कहलाता है उन्होंने कहा कि पाप के शमन के लिए भक्ति करना चाहिए वैराग्य से मन की चंचलता समाप्त हो जाती है ज्ञान से आवरण की निवृत्ति होती है उन्होंने कहा कि सद्कर्म कई प्रकार के होते हैं दान, सेवा सद्कर्म की श्रेणी में आते हैं सभी वेदों का रस श्रीमद् भागवत कथा है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्णा के मोक्ष प्राप्त होने के बाद से कलयुग का प्रारंभ हुआ है।
कथा के प्रारंभ में कथा जजमान शकुंतला पांडे, कुमारी ललिता पांडे, प्रफुल पांडे ने पोथी पूजन किया अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गई इस अवसर पर दिनेश कुमार राय, बहादुर सिंह, परमानंद पाटीदार, जगदीश परिहार, राजेंद्र पुरोहित, विक्रम सिंह सहित नागरिक मौजूद थे।