अंतकरण में कुविचार जागने पर व्यक्ति को कष्ट भोगना पड़ता है – कथा व्यास स्वामी देव स्वरूपानंद महाराज

रतलाम। व्यक्ति के अंतःकरण से सुविचार जागना चाहिए अगर सुविचार जागेगे तो मन में कुविचार नहीं आएंगे अंतकरण में कुविचार जागने पर व्यक्ति को कष्ट भोगना पड़ता है। यह बात सैलाना बस स्टैंड क्षेत्र स्थित अखंड ज्ञान आश्रम में अनंत श्री विभूषित आचार्य महामंडलेश्वर चित्रकूट पीठाधीश्वर डॉ स्वामी दिव्यानंद महाराज के सानिध्य में श्री स्वामी स्वरूपानंद महाराज के तृतीय निर्वाण दिवस के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान कथा व्यास स्वामी देव स्वरूपानंद महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं।
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत पूर्ण ब्रह्म को दर्शाता है उन्होंने कहा कि व्यक्ति का सगुण साकार स्वरूप माया से परे होता है वास्तविक स्वरूप निर्गुण निराकार है, व्यक्ति को यदि भगवत ज्ञान प्राप्त करना है तो उसे राक्षसी प्रवृत्तियां छोड़कर देवीय गुण को अपनाना होगा तो अवश्य भगवत प्राप्ति होगी। व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है पर उसे कभी दूष्टता नहीं करना चाहिए तथा सत्कर्म करते हुए अविनाशी परमात्मा को जानने का प्रयास करना चाहिए, व्यक्ति को मन को सुंदर बनाना चाहिए क्योंकि मन की सुंदरता से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व नजर आता है उन्होंने कहा कि अविद्या ने व्यक्ति को संसार में उलझा दिया है जिससे व्यक्ति के जीवन में व्यवधान आते हैं किंतु आत्मज्ञान से व्यक्ति की अविद्या का नाश होता है व्यक्ति को अपना कार्य धर्म अनुसार करते रहना चाहिए निंदा की चिंता नहीं करना चाहिए बस धर्म के का पालन करते हुए धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए ।
कथा के दौरान नंद उत्सव मनाया गया बधाइयां गाई गई विभिन्न भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया पोथी पूजन कथा जजमान शकुंतला पंड्या, ललित पंड्या व प्रफुल्ल पंड्या ने किया। अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गई कैलाश जाट, राजेंद्र पवार, नारायण लाल शर्मा, अशोक तूवेरिया, जितेंद्र सेन, नारायण जी, गोपाल जी वंदे मातरम सहित नागरिक मौजूद थे।

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