

रतलाम। व्यक्ति के जीवन में यदि विपत्ति आए तो विपत्ति में घर नहीं छोड़ना चाहिए उद्यम करना चाहिए विपत्ति चली जाएगी। यह बात 80 फीट रोड स्थित मांगलिक भवन में भानपुरा पीठ जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं। उन्होंने कहा कि नारद जी ने कहा था प्रभु चिंतन करो चिंतन से दुख चला जाएगा चिंता करने से किसी को मदद मिलती नहीं है और मिल भी नहीं सकती है चिंता व्यक्ति की इच्छा शक्ति व सामर्थ्य को कमजोर करती है। अतः व्यक्ति को जीवन में मजबूत इच्छा शक्ति व सामर्थ्य रखना चाहिए उन्होंने कहा कि सोते हुए सिंह के मुंह में हिरन नहीं चल जाता है सिंह को भी हिरण का शिकार परिश्रम करके करना पड़ता है हिरण पर झपटना पड़ता है तो सिंह को हिरण का शिकार मिलता है। जिस प्रकार व्यक्ति को ऊंचाई पर जाना है तो सीढ़ी दर सीधी चढ़ना होता है इस प्रकार यदि किसी भी समाज को आगे बढ़ाना है तो उन्हें सीढ़ी दर सीढ़ी कार्य करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को प्रसन्न रहना चाहिए तथा चित्त को आनंदित रखना चाहिए जिसके लिए व्यक्ति को शास्त्रों में पांच उपाय बताए गए हैं सेवा, स्वाध्याय, संयम, साधना ,सत्संग यह पांच सोपान है जो व्यक्ति के चित्त को आनंदित व मन को प्रसन्न रखते हैं बशर्ते व्यक्ति का चित्त एकाग्र हो, उन्होंने कहा कि किसी भी वृक्ष को मजबूत रहने के लिए उसके मूल का मजबूत होना जरूरी है अगर मूल कमजोर हो जाएगा तो पेड़ की आयु कमजोर हो जाएगी तथा हवा और पानी पेड़ को गिरा देंगे इसलिए व्यक्ति का मूल भी मजबूत रहना चाहिए तो वह जीवन में सफल रहेगा इस दौरान स्वामी जी का नागरिक अभिनंदन किया गया । धर्म सभा में अनेको नागरिक मौजूद थे अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गई।