मंडी व्यवस्था में व्यापारियों के शोषण के विरुद्ध दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन रतलाम का कड़ा विरोध

रतलाम। दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन रतलाम ने मंडी व्यवस्था में वर्षों से जारी व्यापारियों के शोषण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि व्यापारी वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होने के बावजूद लगातार उपेक्षा और अन्याय का शिकार हो रहा है।
संस्था के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र चत्तर ने बताया कि मंडियों की स्थापना के प्रारंभिक काल से ही व्यापारियों से मंडी शुल्क, विभिन्न शुल्क एवं सेवाओं के नाम पर राशि वसूली जाती रही है। वर्ष 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान शरणार्थियों के नाम पर जो अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था, वह आज तक समाप्त नहीं किया गया, जबकि व्यापारियों ने देशहित में करोड़ों रुपये सरकारी कोष में जमा किए हैं।
संस्था के सचिव श्री हितेश मेहता ने कहा कि व्यापारी वर्ग सरकार के लिए वर्षों से एक निःशुल्क एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए करोड़ों रुपये का राजस्व एकत्र कर रहा है, किंतु इसके बदले मंडियों में न तो पर्याप्त भंडारण सुविधाएं उपलब्ध हैं और न ही व्यापारियों के लिए पेंशन, बीमा अथवा किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। व्यापारियों के बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य सुरक्षा हेतु भी कोई विशेष योजना नहीं है।
दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन ने मंडी अधिनियम के उस प्रावधान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है, जिसमें मंडी शुल्क चोरी के संदेह मात्र पर पूरी कृषि उपज को राजसात कर नीलाम करने का अधिकार दिया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि यह प्रावधान लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत एवं अत्यंत अमानवीय है। यदि कोई व्यापारी त्रुटि करता है, तो उससे दो गुना मंडी शुल्क दंड स्वरूप लिया जाना चाहिए, न कि उसकी पूरी उपज जब्त की जाए।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि मंडी से वसूली गई राशि का अधिकांश भाग स्थापना एवं प्रशासनिक खर्चों में चला जाता है तथा विकास कार्यों पर अत्यंत अल्प राशि व्यय की जाती है। एसोसिएशन ने सरकार को चुनौती दी है कि व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडल के साथ प्रदेश की मंडियों का स्थलीय निरीक्षण किया जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किस प्रकार विभिन्न स्तरों पर राजस्व की हानि हो रही है। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि जहां एक ओर प्रशासनिक तंत्र से जुड़े लोग महंगी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकांश व्यापारी आज भी सीमित संसाधनों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। अंत में दी ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट्स एसोसिएशन रतलाम के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र चत्तर एवं सचिव श्री हितेश मेहता ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से आग्रह किया है कि कृषि सुधार कानूनों को कम से कम भाजपा शासित राज्यों में, विशेष रूप से मध्यप्रदेश में लागू कर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया जाए, जिससे व्यापारी वर्ग को न्याय एवं सम्मान मिल सके।

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