कवि प्रदीप देश की रग रग में बसे हुए हैं- श्री जोशी

  • कवि प्रदीप उच्च कोटि के गीतकार थे- डॉ चांदनी वाला
  • राष्ट्रीय भावना जागृत करने में अग्रणी कवि थे – डॉ. गीता दुबे
  • शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा कवि प्रदीप की स्मृति में आयोजन

रतलाम। कवि प्रदीप प्रत्येक भारतवासी की रग-रग में बसे हुए है ए मेरे वतन के लोगों जैसे अजर अमर गीत लिखकर उन्होंने देशवासियों को अमूल्य धरोहर प्रदान की है इस जीत का प्रत्येक शब्द राष्ट्रीय भावना से परिपूर्ण है। 62 के चीन भारत युद्ध के समय देश गहरे अवसाद में था भारतीय सैनिकों में निराशा थी क्योंकि चीन हम पर भारी पड़ रहा था ऐसे में कवि प्रदीप ने अपने इस ऐतिहासिक गीत से भारतीय सैनिकों में फिर से नया जोश भर दिया था उनके बलिदान की पीड़ा वो भूल गए देशवासियों ने उनके जोश और हौसले को बढ़ाने में अपना पूरा योगदान दिया कवि प्रदीप के गीत ने देशभर में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई।
उक्त विचार शिक्षक संस्कृत संगठन द्वारा राष्ट्रकवि कवि प्रदीप की स्मृति में आयोजित ए मेरे वतन के लोगों कार्यक्रम में वरिषठ पत्रकार तथा कवि प्रदीप के भतीजे शरद जोशी ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच व्यक्त किये।आपने कहा कि कवि प्रदीप देश के गौरव तो थे ही हमारे रतलाम शहर के भी गौरव थे हमारा शहर उनका ननिहाल था यहां शासकीय उ मा विद्यालय क्रमांक एक में वे विद्यार्थी के रूप में कुछ साल यहां रहे उन्होंने अपने नगर से गहरा रिश्ता बना कर रखा उनके गीतों की रचना में रतलाम की स्मृतियां झलकती है श्री जोशी ने उनकी स्मृति में उक्त माणक चौक उ.मा. विद्यालय का नाम कवि प्रदीप के नाम से रखने का शासन से आग्रह किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हैं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला ने कहा कि कवि प्रदीप जिनका असली नाम रामचंद्र नारायण द्विवेदी था अपनी साहित्य साधना से राष्ट्रीय मंच पर किसी सूर्य की तरह चमक रहे थे महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें प्रदीप नाम प्रदान किया था। श्री नित्यानंद जी बाप जी की प्रेरणा से वे मुंबई बॉलीवुड में गए जहां अपनी प्रतिभा और लिखे हुए गीतों से इतनी लोकप्रियता प्राप्त की वह बेहद उच्च कोटि के कवि बने ‌,जिनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएं प्रेम कर्तव्य और बलिदान की भावनाएं झलकती थी, उनके ऐसे कई गीत है जो उन्हें अन्य कवियों की तुलना में श्रेष्ठ ठहराते हैं ‌,दूर हटो ओ दुनिया वालों हिंदुस्तान हमारा है,गीत लिखने पर अंग्रेज शासन ने उनको गिरफ्तार करने का वारंट जारी कर दिया था फिर भी कवि प्रदीप ने लिखना नहीं छोड़ा और अनेक देश भक्ति रचनाओं से देशवासियों को राष्ट्रीय भावना से जोड़ते रहे ए मेरे वतन के लोगों गीत प्रत्येक भारतीय के लिए देशभक्ति का जुनून बन गया जो आज भी हमें राष्ट्र के प्रति जीने की प्रेरणा देता है। विशेष अतिथि डॉक्टर गीता दुबे ने कहा कि हम कवि प्रदीप जी को उनके लिखे गीतों से हमेशा याद रखें उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष उन्हें स्वरांजलि से श्रद्धांजलि अर्पित करें रतलाम वासियों का सौभाग्य है कि कवि प्रदीप जी के चरण यहां पर पड़े हमारे नगर का गहरा रिश्ता उनका रहा है।

उनकी स्मृति रतलाम के लिए सदैव प्रेरक रहेगी
मंच अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि उनके लिखे हुए गीतों ने राष्ट्र के लिए बलिदान की भावना जागृत की अपना सर्वस्व अपने राष्ट्र के लिए समर्पित कर दें यह भावना प्रत्येक भारतीय में विकसित की ऐसे महान कवि का स्मरण राष्ट्र की पवित्र सेवा करने के समान है।
आरंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती एवं कवि प्रदीप जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सरस्वती वंदना बालिकाओं ने प्रस्तुत की अतिथियों का स्वागत दिलीप वर्मा श्याम सुंदर भाटी नरेंद्र सिंह राठौड़ प्रतिभा चांदनी वाला वीणा छाजेड़ आरती त्रिवेदी लेना व्यास शोभा मिश्रा रूप सिंह आदि ने किया संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार नरेंद्र सिंह राठौड़ ने व्यक्त किया।इस अवसर पर संस्था द्वारा विद्यालय परिवार को कवि प्रदीप का चित्र भेंट किया गया।

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