युग प्रवर्तक भगवान ऋषभदेव के जन्म कल्याणक पुरे देशभर में गूंजेगा षट्कर्मों का संदेश

इंदौर (राजेश जैन दद्दू ) । सृष्टि के आदि पुरुष, षटकर्मों के प्रणेता और प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री 1008 ऋषभदेव (आदिनाथ भगवान) का पावन जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव इस वर्ष 12 मार्च, गुरुवार को पूरे देश में बड़े ही हर्ष हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस अवसर पर जैन समाज द्वारा विभिन्न सार्वजनिक आयोजनों के माध्यम से भगवान ऋषभदेव के जीवन दर्शन और उनके द्वारा दी गई जीवन-जीने की कला को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया है।
आदि पुरुष ने दी थी सभ्य समाज की आधारशिला
भगवान ऋषभदेव ने ही इस कलिकाल में भटकती मानवता को सभ्य, सुरक्षित और समृद्ध जीवन जीने का मार्ग दिखाया था। उन्होंने ही समाज को असि (रक्षा), मसि (लेखन), कृषि (खेती), वाणिज्य (व्यापार), शिल्प (कला) और विद्या (ज्ञान) जैसे षटकर्मों की शिक्षा दी। उन्होंने न केवल मोक्षमार्ग का उपदेश दिया, बल्कि संसार में स्वावलंबी जीवन जीने की नींव भी रखी।
सार्वजनिक स्थानों पर होंगे भव्य आयोजन
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं भगवान ऋषभदेव जन्म कल्याणक महोत्सव समिति के मंयक जैन ने भारत वर्षीय सकल जैन समाज से अपील की है कि इस बार यह उत्सव केवल मंदिरों तक सीमित न रहकर जन-मानस के बीच मनाया जाए। महोत्सव के तहत विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है:
धर्मसभा एवं संगोष्ठी: प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर भगवान ऋषभदेव के जीवन वृत्त पर परिचर्चा।भक्तामर पाठ एवं महाआरती: रिद्धि-सिद्धि मंत्रों के साथ सामूहिक दीप प्रज्वलन और भक्तामर पाठ। सर्वधर्म सद्भाव: आयोजनों में जैनेत्तर (अजैन) विद्वानों और गणमान्य नागरिकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा ताकि भगवान ऋषभदेव का वैश्विक संदेश जन जन तक पहुँच सके। भारत वर्षीय
सकल जैन समाज का आह्वान एवं राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि भगवान ऋषभदेव केवल जैनों के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के मार्गदर्शक हैं। अतः इस पावन दिवस को ‘प्रभावना पर्व’ के रूप में मनाते हुए समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ा जाएगा।