महापुरुषों के आदेशों को आत्मसात करना ही धर्म पालन करने के समान है- राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

आबू रोड (जैन स्थानक भवन )। पर्व मानवीय रिश्तो को मजबूत करने और कर्तव्यों का बोध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने होली की पूर्वसंध्या जैन स्थानक भवन आबू रोड पर संबोधित करते कहा कि महापुरुषों के आदेशों को आत्मसात करना ही धर्म पालन करने के समान है।
उन्होंने कहा कि ईर्ष्या, अहंकार, नफरत और द्वेष रूपी दुर्गुणों को तपस्या की ज्वाला में जलाकर आत्मा को करुणा प्रेम और सद्भाव के रंग में रंगने का संकल्प लेकर पर्व को सार्थक बनाना होगा
मुनि कमलेश ने कहा कि पर्वों की ओट में प्रकृति पर राक्षस बनकर इंसान कहर ढा रहा है अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
जैन संत ने बताया कि होली दिवाली रमजान आदि पर्व की ओट में प्रकृति से छेड़छाड़ कर पर्यावरण को नष्ट करने का दुस्साहस करना साक्षात परमात्मा का अपमान करने के समान है।
राष्ट्रसंत में धर्माचार्य से आह्वान किया की उपासना पद्धति का निर्माण पर्यावरण की रक्षा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली वरिष्ठ कार्यकर्ता संगीता दीपक भंडारी उदयपुर ने जल बचाओ वृक्ष बचाओ होली मनाओ का संकल्प दिलाया।

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