स्त्री किसी भी परिस्थिति में संस्कृति और संस्कारों का दामन ना छोड़े

महिला दिवस के संदर्भ में शिक्षक मंच द्वारा स्त्री केंद्रित काव्य गोष्ठी का आयोजन

रतलाम। वर्तमान परिस्थितिया महिलाओं के लिए अत्यधिक चुनौतीपूर्ण है वैश्विक स्तर पर हो अथवा देश की वर्तमान स्थिति हो स्त्री का अस्तित्व हमेशा खतरे में रहा है लेकिन चाहे जितनी भयावह स्थिति हो स्त्री ने अपने आप को संघर्ष के माध्यम से स्थापित किया है।परिस्थितियों चाहे जितनी प्रतिकूल हो संस्कार और संस्कृति से कभी समझौता ना करती है और ना करेगी। यही तो उसकी पूंजी है यही उसका मान और सम्मान है। स्त्री को अपने आप को बदलना होगा तभी समाज और पुरुषों का नजरिया उनके प्रति परिवर्तित होगा बेड़िया और परंपराओं को तोड़कर जिन महान महिलाओं ने इतिहास रचा है उनका गुणगान आज तक होता है और होता रहेगा।
उपरोक्त विचार शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के संदर्भ में स्वर्गीय प्रेरणा तोडगे की स्मृति मैं आयोजित स्त्री केंद्रित कविता पाठ समारोह में उपस्थित प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रवीणा दवेसर ने व्यक्त किये।
आपने प्रसिद्ध कवि स्व. अजहर हाशमी साहब की मशहूर कविता स्त्री तुम महान हो की व्याख्या करते हुए स्त्री की महानता के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किये एवं समाज के प्रति स्त्री के दायित्वों को भी प्रतिपादित किया। प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रतिभा चांदनी वाला ने कहा कि स्त्री को पुरातन परंपराओं से हटकर कुछ करना होगा अपनी गौरवशाली उपस्थिति से समाज के हर क्षेत्र को आलोकित करें यह उसका धर्म है यह उसका कर्म है अपनी कमजोरी और अबालापन त्याग कर वीरता साहस को धारण करें। समाज में अपनी भूमिका खुद निर्धारित करें तभी वह आगे रह पाएगी और पुरुष प्रधान समाज में अपना अधिकार और सम्मान प्राप्त कर पाएगी।
प्रसिद्ध समाजसेवी का श्रीमती वीणा छाजेड ने कहा कि पुरुषों को स्त्री की प्रतिभा पर भरोसा करना होगा उसकी सामर्थ्य को पहचाना होगा उसे अवसर प्रदान करना होंगे तो वह अपनी प्रतिभा से परिवार समाज और देश को नई दिशा दे सकती है
विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी और सफलताएं इस बात का प्रबल प्रमाण है।
समाजसेवी संस्थाएं महिला प्रधान कार्यक्रमों को प्रमुखता से आयोजित करें आपने शिक्षक सांस्कृतिक मंच को बधाई देते हुए कहा कि यह उत्कृष्ट गतिविधि है महिलाओं के लिए ऐसे रचनात्मक और सृजनात्मक कार्यक्रम से महिलाओं का सम्मान पड़ता है।
आरंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर और स्व. प्रेरणा तोगडे के चित्र माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया सरस्वती वंदना आरती त्रिवेदी ने प्रस्तुत की। स्वागत भाषण संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की अतिथियों का स्वागत राधेश्याम तोगड़े दिलीप वर्मा नरेंद्र सिंह राठौड़ कृष्ण चंद्र ठाकुर मिथिलेश मिश्रा मदन लाल मेहरा कविता सक्सेना भारती उपाध्याय दशरथ जोशी अनिल जोशी रमेश परमार आदि ने किया। तत्पश्चात नगर के काव्य प्रेमी कवियों ने अपनी रचनाओं से महिलाओं के सम्मान में कविताएं प्रस्तुत की। कविता पाठ करने में डॉक्टर मुरलीधर चांदनी वाला, डॉ सुलोचना शर्मा, डॉ.गीता दुबे, ओमप्रकाश मिश्र, इतिहास विद डॉ. प्रदीप सिंह, राव रंग गर्मी कैलाश व्यास, अनीश खान, अंजुम खान, ललिता कुशवाहा, रक्षा के कुमार, श्याम सुंदर भाटी, कैलाश वशिष्ठ, नूतन मजावदिया, रीता दीक्षित, अर्चना अग्रवाल, कविता व्यास, राधेश्याम तोगडे, नीलिमा छवि सिंह, इंदू सिन्हा, सुनीता जैन, योगिता राजपुरोहित अनिल भट्ट आदि ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध शिक्षिका विनीता ओझा को मंच द्वारा सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का संचालन विनीता पटेल ने किया तथा आभार कविता सक्सेना ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम मैं श्री रणजीत सिंह राठौड़, सत्यनारायण सोढा, एमके व्यास, तेजपाल सिंह राणावत, कमल सिंह राठौड़, एम के व्यास, आइ, एल पुरोहित, सिंधु ओझा, प्रतीक तोगडे, अर्पित मेहरा, सहित नगर के बुद्धिजीवी गणमान्यजन उपस्थित थे।

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