एक पुण्य निर्णय बना दो जीवनों की रोशनी, नेत्रदान से समाज को मिला करुणा का संदेश

रतलाम। जब जीवन की अंतिम यात्रा पूरी होती है, तब यदि किसी के नेत्र किसी और की दुनिया रोशन कर दें तो इससे बड़ा मानव धर्म और कोई नहीं। रामगढ़ चौड़ा वास निवासी स्व. रामनारायण सोलंकी के ज्येष्ठ पुत्र जगदीश सोलंकी के निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान कर समाज को मानवता और करुणा का प्रेरणादायी संदेश दिया।
परिजनों के इस साहसिक और संवेदनशील निर्णय से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना है, जिससे उनके जीवन में आशा, आत्मविश्वास और उजाले का संचार होगा। यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
इस पुनीत कार्य के लिए गोपाल राठौड़ ‘पतरा वाला’ ने दिवंगत के पुत्र मनोज सोलंकी, पंकज सोलंकी एवं समस्त परिजनों को नेत्रदान के महत्व से अवगत कराया। परिजनों ने दुःख की इस घड़ी में मानवता को सर्वोपरि रखते हुए सहर्ष नेत्रदान की अनुमति प्रदान कर समाज के समक्ष अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने जानकारी देते हुए बताया कि परिजनों की स्वीकृति मिलते ही गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को तत्काल सूचित किया गया। डॉ. ददरवाल के मार्गदर्शन में उनकी टीम के परमानंद राठौड़ ने तत्परता से मौके पर पहुंचकर नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया को पूर्ण निष्ठा एवं सम्मान के साथ सफलतापूर्वक संपन्न किया।
नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान परिवारजन, रिश्तेदार, मित्र एवं शुभचिंतक उपस्थित रहे। सभी ने कॉर्निया दान की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष देखा, जिससे वर्षों से चली आ रही भ्रांतियाँ दूर हुईं और कई लोगों ने भविष्य में स्वयं एवं अपने परिजनों के नेत्रदान का संकल्प लिया।
इस अवसर पर गोपाल राठौड़ ‘पतरा वाला’, मोहनलाल राठौड़, प्रेमनारायण राठौड़, कैलाश जमादार, नंदकिशोर राठौड़, रामेश्वर सोलंकी, संजय राठौड़, सुशील मीनू माथुर, भगवान ढलवानी सहित अनेक समाजसेवी एवं नागरिक उपस्थित रहे।
नेत्रम संस्था द्वारा परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उदारता, करुणा एवं मानवता के प्रति समर्पण का सम्मान किया गया।
नेत्रम संस्था समाज से भावपूर्ण अपील करती है कि नेत्रदान जैसे महान पुण्य कार्य में अधिक से अधिक लोग सहभागी बनें। संस्था नेत्रदान के लिए 24×7 सेवा एवं सहायता उपलब्ध करवाती है। किसी भी प्रकार की सूचना समय पर नेत्रम संस्था को देने से नेत्रदान की संपूर्ण व्यवस्था अत्यंत शीघ्र, सम्मानजनक एवं सुचारू रूप से संपन्न की जा सकती है। एक सही समय पर लिया गया निर्णय किसी के जीवन में हमेशा के लिए उजाला भर सकता है।

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