
शिवाय (दिगंबर जैन मंदिर 30 मार्च 2021) । संयम नियम उप नियम जो आत्मा की सुरक्षा के लिए विवेक पूर्वक उपयोग लिया जाए तो वरदान बनता है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने दिगंबर जैन मंदिर में संबोधित करते हुए कहा कि साधना को लेकर संघर्ष पैदा किया जाए तो आत्मा के लिए अभिशाप बनता है । उन्होंने कहा कि बाहरी उपासना पद्धति को लेकर टकराव तनाव से कषाय पैदा करके साधु शैतान का रूप ले लेता है दुर्गति का मेहमान बनता है।
मुनि कमलेश ने कहा कि धर्म को लेकर मानवीय रिश्तो में खरोच आती है तो वह धर्म पाप के रूप में बदल जाता है ।
जैन संत ने बताया की साधना के मार्ग अनेक हो सकते हैं लेकिन सब की मंजिल एक है निर्मलता और वीतरागता । प्रसिद्ध दिगंबर मुनि आभार सागर जी ने कहा कि भगवान महावीर का अनेकांतवाद के सिद्धांत में सभी समस्याओं का समाधान संभव है आज दुर्भाग्य है प्रभु के उपासक एकांत वाद पर अड़े हुवे धर्म की जाजम को अखाड़ा बना दिया है ।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रसंत जैसे उदारवादी परस्पर समन्वय स्थापित करने वाले संत ही मानवता के लिए आदर्श है आपसे अच्छी संभावनाएं समाज और देश को दिगंबर माताजी ने मुनि कमलेश के अहिंसा और एकता के प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।