
इंदौर (राजेश जैन दद्दू ) । विश्व जैन ध्वज दिवस प्रतिवर्ष 22 मार्च पुरे भारत में बड़े ही उत्साह उमंग के साथ मनाया जाता है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के जन्म/तप कल्याणक से प्रेरित होकर जैन धर्म की पताका फहराने के लिए समर्पित है। इस दिन घरों और मंदिरों पर पचरंगा जैन ध्वज लगाकर जैन धर्म संस्कृति के सिद्धांतों का प्रसार किया जाता है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मंयक जैन एवं दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ जन डॉ जैनेन्द्र जैन हंसमुख गांधी टीके वेद सुशील पांड्या भुपेंद्र जैन राकेश विनायक संजय अहिंसा एवं फेडरेशन की शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल श्रीमती रेखा जैन श्रीफल श्रीमती मुक्ता जैन आदि ने जैन ध्वज दिवस की पुरे भारत वर्षीय जैन समाज को बंधाई दी।
दद्दू ने बताया कि जैन ध्वज और दिवस के मुख्य बिंदु: प्रतीक: ध्वज में पांच रंग (लाल, पीला, सफेद, हरा, नीला) होते हैं, जो पंच परमेष्ठी (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) के प्रतीक हैं।
डिजाइन: इसमें पचरंगा रंगों के साथ स्वस्तिक (चार गतियों का प्रतीक), तीन डॉट्स (रत्नत्रय – सम्यक दर्शन, ज्ञान, चरित्र), और सिद्धशिला अंकित होती है।
महत्व: यह ध्वज अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का संदेश देता है। यह विशेष दिन जैन धर्म की एकता, प्रभावना और तीर्थंकरों की शिक्षाओं के प्रति आस्था प्रकट करने का एक माध्यम है।