भगत सिंह का दृष्टिकोण तार्किक और वैज्ञानिक रहा – प्रो. चौहान

जनवादी लेखक संघ का आयोजन

रतलाम । भगतसिंह का जीवन और दर्शन तार्किक और वैज्ञानिक रहा। उन्होंने मनुष्यता की रक्षा और जीवन मूल्यों के साथ आज़ादी के लिए संघर्ष किया। अपने साथी सुखदेव और राजगुरु के साथ फांसी का फंदा चूमते वक़्त भी उन्हें अपनी मृत्यु पर दुख नहीं था, बल्कि वे अपने आप को मातृभूमि पर समर्पित करते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहे थे । भगत सिंह का जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है ।
उक्त विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित जिला सम्मेलन में शहीदी दिवस पर केन्द्रित आयोजन में शहीदों का स्मरण करते हुए कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि वर्तमान समय इतिहास को मिथक और मिथक को इतिहास बनाने का है । भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों ने अपने समर्पण से सामाजिक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सौहार्द्र के जिस वातावरण को निर्मित किया , वह हमारे लिए प्रेरणादायी है ।
विशेष अतिथि पूर्व प्राचार्य आशा श्रीवास्तव ने कहा कि युवा क्रांतिकारी जेल में कितनी यातना के दौर से गुज़रे ,अगर उन्हें देखा जाए तो हमारा रोम रोम खड़ा हो जाता है । उनके बलिदान को हमें व्यर्थ नहीं जाने देना है।मांगीलाल नगावत ने अपना आलेख पढ़ते हुए कहा कि भगत सिंह के विचारों और दर्शन को आज सभी अपने-अपने हित की तरफ मोड़ रहे हैं । ऐसी परिस्थितियों में भगतसिंह का सही विचार सामने आना ज़रूरी है ।
भगत सिंह के पत्रकारिता पर ‘समर में शब्द’ पुस्तक के लेखक आशीष दशोत्तर ने कहा कि भगत सिंह का लेखकीय जीवन पांच वर्षों का रहा । इस दौरान उन्होंने जो लेखन किया हुआ वह पूरे समाज का आईना बना हुआ है।
रंगकर्मी युसूफ जावेदी ने कहा कि भगतसिंह के विचार हमें सदैव प्रेरित करते हैं । वे क्रांतिकारियों के नायक तो थे ही युवाओं में देश प्रेम की भावना का प्रसार करने वाले अजेय योद्धा भी थे । रणजीत सिंह राठौर ने कहा कि जलेसं प्रतिवर्ष शहीदी दिवस पर विशेष आयोजन कर क्रांतिकारियों का स्मरण करता है।‌डॉ .एन.के. शाह ने कहा कि जिस भारत का स्वप्न देखकर हमारे वीरों ने अपनी जान दी, वे स्वप्न आज भी अधूरे हैं आम आदमी को अपनी समस्याओं के लिए आज भी बरसों संघर्ष करना पड़ रहा है। वरिष्ठ रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र,आई. एल. पुरोहित, विनोद झालानी, कीर्ति शर्मा, श्याम सुंदर भाटी ने भी भगत सिंह के जीवन और चरित्र पर प्रकाश डाला।

इन्होंने सहभागिता की

संगोष्ठी में भगतसिंह के जीवन की व्याख्या करते हुए डॉ.पूर्णिमा शर्मा, डॉ.गीता दुबे, सुभाष यादव, एस.के. मिश्रा, हरिशंकर भटनागर ,हीरालाल खराड़ी , सत्यनारायण सोडा , जितेंद्र सिंह पथिक , कीर्ति शर्मा सिद्दीक़ रतलामी, सुभाष यादव, श्याम सुंदर भाटी ,अलका तिवारी, रचना चंद्रावत , डॉ. गीता दुबे , पद्माकर पागे, गीता राठौर , पुष्प लता शर्मा, विनोद झालानी, संजय परसाई, लक्ष्मण पाठक , बेनी प्रसाद सपरी, कला डामोर ने सहभागिता की। इस अवसर पर सुधिजन मौजूद थे।

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