

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । साधना नगर स्थित पंचबालयति जिनालय परिसर में सुबह भक्ति, उत्साह और संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातः 6:30 बजे से ही बच्चों का आगमन प्रारंभ हो गया और सुबह 7:00 बजे तक पूरा परिसर बच्चों से खचाखच भर गया। वातावरण में धार्मिक उल्लास के साथ बच्चों के चेहरों पर सीखने का उत्साह स्पष्ट झलक रहा था।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि आध्यात्मिक संस्कारों, जीवन जीने की कला और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने के उद्देश्य से 26वें जैनत्व बाल संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ 22 मार्च से किया गया। आठ दिवसीय इस शिविर में 6 से 20 वर्ष तक के 550 से अधिक बच्चे एवं युवा भाग ले रहे हैं। विभिन्न कक्षाओं के माध्यम से उन्हें धर्म, संस्कृति, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा के साथ-साथ लौकिक शिक्षा भी प्रदान की जा रही है।
शिविर में देशभर से आए 17 शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण विद्वान एवं स्थानीय शिक्षक प्रशिक्षण दे रहे हैं। बच्चों के संस्कार निर्माण हेतु पं. रितेश शास्त्री (सनावद), पं. अशोक मांगुलकर (राघौगढ़), पं. सौरभ शास्त्री, पं. गौरव शास्त्री सहित अन्य विद्वान विशेष कक्षाएं ले रहे हैं। वहीं बड़ों के लिए प्रौढ़ कक्षा एवं कपल शिविर का संचालन पं. अमन शास्त्री द्वारा किया जा रहा है।
कार्यक्रम के प्रमुख संयोजक एवं ट्रस्ट अध्यक्ष विजय बड़जात्या, पं. तेजकुमार गंगवाल एवं महामंत्री सुशील काला ने बताया कि शिविर प्रतिदिन प्रातः 6:30 बजे से दोपहर 11:45 बजे तक संचालित होगा। सभी प्रतिभागियों को निःशुल्क किट, धार्मिक पुस्तकें, दूध, चाय-नाश्ता एवं भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
शिविर का शुभारंभ सुरेशजी–सुशीलाजी जैन परिवार द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ, जबकि जिनेषजी–रूपमजी जैन एवं कैलाशचंदजी वेद परिवार ने उद्घाटन किया। डॉ. कमल पंचोली द्वारा बच्चों को निःशुल्क धार्मिक पुस्तकें एवं स्टेशनरी वितरित की गई।
दूर-दराज से आने वाले बच्चों की सुविधा हेतु वेदांश स्कूल एवं आई.एम.आई. कॉलेज द्वारा बसों की व्यवस्था की गई है। शिविर के सफल संचालन में अखिल भारतीय दिगंबर जैन युवा फेडरेशन, मुमुक्षु महिला मंडल, यंग जैन प्रोफेशनल्स एवं दिगंबर जैन सोशल ग्रुप जीनियस का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है। यह शिविर श्री दिगंबर जैन कुंदकुंद परमागम ट्रस्ट द्वारा साधर्मियों के सहयोग से पूर्णतः निःशुल्क आयोजित किया जा रहा है, जो बच्चों में संस्कार, अनुशासन एवं धार्मिक मूल्यों के बीजारोपण का सशक्त माध्यम बन रहा है।