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रतलाम। हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर सेवावीर सामाजिक कल्याण समिति द्वारा दिनांक 23 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक 11 दिवसीय अखंड श्री हनुमान चालीसा पाठ का भव्य एवं दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन ने पूरे नगर को भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
इस महाआयोजन में नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों तथा जिला एवं प्रदेश से बाहर के भक्तों सहित हजारों धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। संतों के पावन सानिध्य में सम्पन्न यह आयोजन श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन गया, जहां हर भक्त ने अपने भाव श्री हनुमान जी के चरणों में अर्पित किए।
कार्यक्रम में सभी वर्गों की अद्भुत सहभागिता देखने को मिली — सामाजिक एवं सेवा संगठन, राजनीतिक एवं गैर-राजनीतिक संस्थाएं, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थान, विद्यार्थी-शिक्षक, प्रभात एवं संध्या फेरी समितियां, भजन मंडल, रामायण एवं सुंदरकांड मंडल, व्यायामशाला, हेल्थ क्लब, ग्रामीणजन, विभिन्न एसोसिएशन, बुद्धिजीवी वर्ग, वरिष्ठजन, मातृशक्ति एवं युवा वर्ग ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस दौरान कई श्रद्धालु हनुमान चालीसा पाठ करते-करते भावुक हो उठे और उनकी आंखों से अश्रुधारा स्वतः बहने लगी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं पवनपुत्र हनुमान जी की कृपा वहां उपस्थित प्रत्येक हृदय को स्पर्श कर रही हो।
दिव्य अर्चन और अलौकिक व्यवस्था
पूरे 11 दिनों तक प्रतिदिन श्री हनुमान जी का 1008 नामों से अर्चन किया गया, जिसमें सूखा मेवा, सिंदूर, हल्दी, कमलगट्टे, लौंग, काली मिर्च, इलायची एवं बीड़ा अर्पित किए गए। अर्चन से पूर्व भगवान तथा दिव्य गदा जी का दैनिक अभिषेक किया जाता रहा।आयोजन में विराजित श्री दिव्य गदा जी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। गदा जी को विभिन्न चमत्कारी एवं प्रसिद्ध मंदिरों में अभिषेक कराकर, उन देवताओं की ऊर्जा को समाहित करते हुए यहां स्थापित किया गया। साथ ही विभिन्न तीर्थों, कुंडों, नदियों और समुद्रों का पवित्र जल तथा अखंड ज्योत भी दर्शन हेतु स्थापित की गई, जिसने श्रद्धालुओं की आस्था को और प्रगाढ़ किया।
भक्तों द्वारा श्री गदा जी के समक्ष अक्षत अर्पित कर अर्जी लगाई गई, जिसके पश्चात कई श्रद्धालुओं ने अपने चमत्कारिक अनुभव भी समिति के साथ साझा किए।
आकर्षण का केंद्र बनी आध्यात्मिक प्रदर्शनी
आयोजन स्थल पर एक भव्य प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें गदा जी के अभिषेक स्थलों के चित्र, सेवावीर परिवार के सेवा कार्य, 18 पुराणों का दर्शन, दिव्य शस्त्र एवं शास्त्रों की जानकारी, कुटुंब प्रबोधन प्रदर्शनी एवं मंगलवार हनुमान चालीसा पाठ की सूची प्रमुख आकर्षण रहे।
समापन के क्षण बने अलौकिक अनुभव
ग्यारहवें दिन 2 अप्रैल, हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुबह से ही दिव्य जल एवं प्रसादी का वितरण प्रारंभ हो गया। दिनभर पूजन-अर्चन एवं अभिषेक के पश्चात पूर्णाहुति स्वरूप हवन किया गया, जिसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ हुआ।
जैसे ही अंतिम हनुमान चालीसा प्रारंभ हुई, वैसे ही अचानक तेज हवा और बारिश शुरू हो गई — मानो स्वयं हनुमान जी महाराज ने पवन रूप में अपनी उपस्थिति का आभास कराया हो। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह दिव्य संयोग भक्तों के लिए अत्यंत शुभ एवं आध्यात्मिक अनुभूति का विषय बना।
इसी बीच अचानक बिजली गुल हो गई, जिससे वातावरण और भी अलौकिक हो उठा। हजारों भक्तों ने अपने मोबाइल की रोशनी में अश्रुपूर्ण नेत्रों से चालीसा का पाठ जारी रखा। हर स्वर में भक्ति थी, हर आंख में आंसू — यह दृश्य किसी चमत्कार से कम नहीं था। इतनी विशाल भीड़ होने के बावजूद अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला।
तीसरी बार विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम
इस ऐतिहासिक आयोजन के माध्यम से भक्तों ने तीसरी बार विश्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया, जिसमें London Book of World Records, World Book Records एवं Web World Records शामिल हैं।
भक्ति और संगठन की अद्वितीय मिसाल
कार्यक्रम के समापन पर सेवावीर परिवार ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों, कार्यकर्ताओं एवं सहभागी संस्थाओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज की एकता, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा।
अंत में…यह आयोजन यह संदेश दे गया कि जब भक्ति में शक्ति, सेवा में समर्पण और समाज में एकता हो, तो ईश्वर स्वयं अपनी उपस्थिति का आभास कराते हैं।