

रतलाम। शिवगढ़ एवं रतलाम में मानवता, संवेदनशीलता और समाजसेवा की एक अत्यंत प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है, जहाँ गहरे दुःख के क्षणों में भी परिजनों ने अपने प्रियजनों के नेत्रदान का निर्णय लेकर कई अंधेरी जिंदगियों में उजाला फैलाने का महान कार्य किया।
पहला नेत्रदान शिवगढ़ निवासी स्वर्गीय मोहनलाल परमार के असामयिक निधन के पश्चात संपन्न हुआ। इस पुनीत कार्य के लिए दीपक तांतेड़, पी. तांतेड़ एवं राजेश सोलंकी ने परिजनों को प्रेरित किया। उनके पुत्र दिनेश, राजेश व संतोष तथा पौत्र रवि (गोलू), महेंद्र व रितेश ने सहमति देकर यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी और के जीवन में रोशनी बन सके। नेत्रम संस्था के सहयोग से डॉ. जी. एल. ददरवाल द्वारा यह नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
दूसरा नेत्रदान रतलाम के शास्त्री नगर निवासी स्वर्गीय श्रीमती दमयंती मूले (धर्मपत्नी स्व. वसंतराव कोलंबेकर) के 85 वर्ष की आयु में स्वर्गवास होने पर संपन्न हुआ। इस महान कार्य के लिए सुनील जैन (एडवोकेट), डॉ. प्रतीक मालपानी, नंदकिशोर पाटीदार, मंजूला माहेश्वरी एवं गोविंद काकानी ने परिजनों को प्रेरित किया। सुपुत्र संतोष कोलंबेकर, सुपुत्री प्रतीक्षा योगदंड, बहू रश्मि तथा पौत्र निर्विघ्न एवं पोती मनस्वी कोलंबेकर ने सहमति प्रदान कर यह सिद्ध कर दिया कि करुणा ही सच्ची मानवता है। यह नेत्रदान काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन एवं नेत्रम संस्था के सहयोग से, बड़नगर की टीम द्वारा रतलाम में सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने बताया कि परिजनों की सहमति मिलते ही गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी. एल. ददरवाल को तुरंत सूचना दी गई। उनके मार्गदर्शन में टीम के परमानंद राठौड़ एवं मोहनलाल राठौड़ ने समय पर पहुंचकर पूर्ण सम्मान, संवेदनशीलता और निष्ठा के साथ नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
इस दौरान हेमंत मूणत, गोविंद काकानी, नवनीत मेहता, शलभ अग्रवाल, सुशील मीनू माथुर, उदित अग्रवाल एवं संजय मुसले उपस्थित रहे।
अंत में गीता भवन न्यास बड़नगर, नेत्रम संस्था एवं काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उदारता, संवेदनशीलता और मानवता के प्रति समर्पण को सम्मानित किया गया।