समता, विनय और नवकार मंत्र से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है

मुनि श्री 108 निर्णय सागर जी महाराज के प्रवचन में सोना-मिट्टी समान भाव और नमस्कार के महत्व पर प्रकाश डाला

रतलाम, 17 अप्रैल । स्टेशन रोड स्थित चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री 108 निर्णय सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में आत्मकल्याण के लिए समता, विनय और नवकार मंत्र के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि मुनि के लिए सोना और मिट्टी दोनों समान होते हैं, क्योंकि उनके मन में किसी भी वस्तु के प्रति न राग होता है और न ही द्वेष क्योंकि मिट्टी और सोने में समानता का गुण है और वही आप लोगों के लिए सोने का अधिक महत्व है मिट्टी के बजाय!

समता ही मोक्ष का आधार
मुनि श्री ने कहा कि जब तक मनुष्य वस्तुओं में भेदभाव करता है, तब तक वह संसार के बंधनों में जकड़ा रहता है। मुनि अवस्था में साधक सोना और मिट्टी को समान मानकर समभाव में रहता है। यही समता भाव मोक्ष मार्ग की ओर ले जाने वाला प्रमुख तत्व है।

मुनि को नमस्कार करने से मिलता है अनंत पुण्य
प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने नमस्कार के महत्व को बताते हुए कहा कि यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि का साधन है।
जैनाचार्य कुंदकुंद स्वामी के अनुसार विनय से ही ज्ञान की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि सच्चे भाव से किया गया नमस्कार अनंत पुण्य प्रदान करता है और जीव के भवों को सुधार देता है।

मुनि और ग्वाल की कथा से मिला संदेश
मुनि श्री ने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि एक ग्वाले ने श्रद्धा से दिगंबर जैन मुनि को नमस्कार किया। उसके शुद्ध भाव के कारण उसे अगले जन्म में देव गति प्राप्त हुई। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि कर्म का फल बाहरी क्रिया से नहीं, बल्कि आंतरिक भावना से निर्धारित होता है।

नवकार मंत्र—सभी मंत्रों का मूल
मुनि श्री ने नवकार मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि यह मंत्र गुणों की वंदना का प्रतीक है। यह आत्मा को शुद्ध करता है, पापों का क्षय करता है और साधक को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है। इसलिए जीवन में नवकार मंत्र की आराधना जरूरी है और जिनवाणी को जीवन में उतरना भी उतना ही आवश्यक क्योंकि यह ही मोक्ष दे सकते हैं।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में दौरान श्रावक श्राविका एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने धर्म लाभ प्राप्त किया। अंत में मुनि श्री ने सभी को अपने जीवन में समता, विनय और नवकार मंत्र को अपनाने का संदेश दिया।

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