नेत्रदान बना मानवता की मिसाल : विद्यादेवी भिड़वाल ने दो नेत्रहीनों को दी नई रोशनी

रतलाम। “मृत्यु के बाद भी किसी की आँखों से दुनिया देखना संभव है”—इस प्रेरणादायी संदेश को साकार करते हुए मंगलमूर्ति कॉलोनी निवासी श्री हरिओम भिड़वाल की धर्मपत्नी श्रीमती विद्यादेवी भिड़वाल के असामयिक निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान कर समाज के सामने मानवता की अद्भुत मिसाल पेश की।
दुःख की इस घड़ी में भी परिजनों ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए नेत्रदान की सहमति प्रदान की। इस पुनीत निर्णय से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना बनी है, जिससे उनके जीवन में आशा, आत्मविश्वास और उजाले का संचार होगा।
इस कार्य के लिए सुशील ‘मीनू’ माथुर ,हरेन्द्रसिंह राठौड़ ने दिवंगत के पुत्र पटवारी सुशील भिड़वाल, अध्यापक हरीश भिड़वाल एवं समस्त परिजनों को नेत्रदान के महत्व से अवगत कराया। परिजनों ने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए सहर्ष अनुमति प्रदान की।
नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत ने जानकारी देते हुए बताया कि सहमति मिलते ही रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचित किया गया। उनके मार्गदर्शन में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर राजवंत सिंह, विनोद कुशवाह एवं भावना खन्ना की टीम ने जीवन सिंह के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की।
इस सेवा कार्य में यशवंत पावेचा द्वारा अपने निजी वाहन से मेडिकल टीम को दिवंगत के निवास तक लाने एवं पुनः मेडिकल कॉलेज पहुँचाने की व्यवस्था की गई। इस दौरान ओमप्रकाश अग्रवाल, नवनीत मेहता, सुशील ‘मीनू’ माथुर, यशवंत पावेचा, हरेन्द्र सिंह राठोड़, संजय राठोड़, प्रमोद बरानिया, अनिल भावसार, राजेश स्वर्णकार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर नेत्रम संस्था एवं डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज शासकीय नेत्र बैंक द्वारा परोपकारी परिवार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही समाज में नेत्रदान एवं देहदान की महत्ता को समझाते हुए अधिक से अधिक लोगों को इस महान कार्य हेतु प्रेरित करने का संकल्प लिया गया।

नेत्रम संस्था का संदेश

नेत्रदान एक महादान है, जो किसी के अंधकारमय जीवन में उजाला ला सकता है। समाज के सभी जागरूक नागरिकों से अपील है कि वे इस पुनीत कार्य के लिए आगे आएं और मानवता की सेवा में सहभागी बनें।

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