“पहले पूजा फिर काम दूजा” – आचरण की शुद्धता और नियम पालन से ही बढ़ती है श्रद्धा और सफलता


रतलाम 19 अप्रैल। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर स्टेशन रोड स्थित चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान 1008 श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन एवं आचार्य भक्ति के साथ संगीतमय पूजन किया गया। साथ ही श्री पंच परमेष्ठी विधान महामंडल की भी विधिवत पूजा संपन्न हुई।
कार्यक्रम में युग शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि निर्णय सागर जी मसा. एवं क्षुल्लक तत्व सागर जी मसा.की पावन उपस्थिति रही। मुनि श्री निर्णय सागर जी म.सा ने अपने प्रवचन में कहा कि अक्षय तृतीया महापर्व आत्मशुद्धि, संयम और तपस्या का संदेश देता है। उन्होंने “पहले पूजा फिर काम दूजा” का संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में धार्मिक नियमों का दृढ़ता से पालन करना चाहिए।
उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि केवल बाअक्षय तृतीया पर चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में विशेष पूजन, मुनिश्री निर्णय सागर जी के प्रवचन में संयम और आहारदान पर दिया जोरहरी नियमों का दिखावा न करें, बल्कि वास्तविक आचरण में शुद्धता लाएं। रात्रि भोजन त्याग जैसे नियमों का पालन ईमानदारी से किया जाना चाहिए, अन्यथा समाज में गलत संदेश जाता है।
मुनिश्री ने आहारदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुद्ध भाव और शुद्ध आहार से किया गया दान अत्यंत फलदायी होता है। “चक्रवर्ती भी आहारदाता थे, तो हम क्यों नहीं” — इस संदेश के माध्यम से उन्होंने सभी को आहारदान के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने श्रावकों को नियमित रूप से पाठशाला आने, सामायिक, प्रतिक्रमण और अभिषेक पूजन करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही व्यापारियों को संदेश दिया कि वे अपने व्यवसाय को भगवान के चरणों में समर्पित भाव से चलाएं और प्रतिदिन मंदिर आकर पूजा-अर्चना करें, जिससे श्रद्धा, विश्वास और सफलता में वृद्धि होती है।
मुनिश्री ने अंत में कहा कि त्याग और तपस्या की शक्ति से ही तीर्थंकर पद की प्राप्ति होती है, अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में संयम और साधना को अपनाना चाहिए। इसमें श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन श्रावक संघ समाज जन महिलाएं एवं पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मुक्त जानकारी अनुराग जैन एवं मांगीलाल जैन ने दी।