छोटे नियमों से बड़ा आत्मकल्याण संभव : मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज

स्टेशन रोड स्थित चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा, संयम और साधना पर दिया प्रभावी मार्गदर्शन

रतलाम 02 मई । स्टेशन रोड स्थित श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री 108 श्री निर्णय सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में नियम, संयम और साधना के महत्व पर विस्तार से प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति यदि सच्चे मन से छोटे-छोटे नियमों का पालन करे, तो वह निश्चित रूप से आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।
मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, उसी प्रकार छोटे-छोटे सत्कर्म और नियम आत्मा की शुद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि जब साधक बाहरी विषयों से हटकर आत्मा की ओर केंद्रित होता है, तब वास्तविक आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त होती है। प्रवचन में उन्होंने यह भी कहा कि नियम लेना सरल है, किंतु उसे निरंतर निभाना ही सच्चा तप है। एक प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि एक साधारण व्यक्ति ने छोटा-सा नियम लेकर उसे पूर्ण निष्ठा से निभाया, जिसके परिणामस्वरूप उसके जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन आया।
मुनि श्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सत्संग के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि अच्छे व्यक्तियों और संतों का संग जीवन को दिशा देता है, जबकि कुसंगति व्यक्ति को पतन की ओर ले जाती है। कार्यक्रम के दौरान अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय एवं धर्मचर्चा का आयोजन किया गया।
मुनि श्री ने धर्मसभा का सार कहा कि आत्मोन्नति के लिए बड़े त्याग आवश्यक नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और छोटे-छोटे नियमों का नियमित पालन ही व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। उक्त बात अपने प्रवचन में कहीं। इसमें समाज जैन श्रावक,श्राविका सहित श्रोतागण, महिला मंडल, श्री चंद्र दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं सदस्य ने धर्म लाभ लिया ।

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