मंदसौर–दलौदा नवीन दोहरीकृत रेलखंड का सीआरएस निरीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न

रतलाम–चित्तौड़गढ़ रेलखंड हुआ पूर्ण दोहरीकृत रेलखंड

रतलाम 08 मई। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल अंतर्गत नीमच–रतलाम दोहरीकरण परियोजना के तहत मंदसौर–दलौदा रेलखंड के लगभग 14 किलोमीटर लंबे नवीन दोहरीकृत खंड का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा निरीक्षण एवं गति परीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न कर लिया गया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ ही लगभग 133 किलोमीटर लंबे नीमच–रतलाम रेलखंड का दोहरीकरण कार्य लगभग पूर्ण हो गया है तथा रतलाम–चित्तौड़गढ़ लगभग 190 किलोमीटर लंबा रेलखंड पूर्ण रूप से दोहरीकृत रेलखंड बन गया है।
पश्चिम परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त श्री ई. श्रीनिवास ने 08 मई 2026 को मंदसौर–दलौदा रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान नवीन दोहरीकृत रेललाइन के अंतर्गत निर्मित पुलों, रेलवे ट्रैक, ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई), सिग्नलिंग प्रणाली तथा अन्य सभी संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का सूक्ष्म परीक्षण किया गया। इससे पूर्व 06 मई 2026 को इस खंड पर स्थित शिवना ब्रिज का भी गहन निरीक्षण किया गया था।
निरीक्षण के उपरांत 08 मई 2026 को नवीन दोहरीकृत रेलखंड पर विशेष निरीक्षण यान को लगभग 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से संचालित कर ट्रैक की गुणवत्ता, स्थिरता एवं संरक्षा मानकों की जांच की गई। निरीक्षण एवं गति परीक्षण संतोषजनक पाए जाने के पश्चात रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा मंदसौर–दलौदा दोहरीकृत रेलखंड पर यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन हेतु उपयुक्तता प्रमाणपत्र जारी किया गया।
पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी श्री मुकेश कुमार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मंदसौर–दलौदा खंड को संचालन की स्वीकृति मिलने के साथ ही नीमच–रतलाम दोहरीकरण परियोजना का एक महत्वपूर्ण चरण पूर्ण हो गया है। यह परियोजना रतलाम मंडल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि रतलाम–चित्तौड़गढ़ रेलखंड न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन, संस्कृति एवं औद्योगिक गतिविधियों की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रेलमार्ग है।
नीमच–रतलाम रेलखंड का दोहरीकरण क्षेत्रीय विकास को नई गति प्रदान करेगा। दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की संख्या एवं गति में वृद्धि संभव हो सकेगी, जिससे यात्रियों के समय की बचत होगी तथा रेल संचालन अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनेगा। अब सिंगल लाइन के कारण होने वाली क्रॉसिंग एवं ट्रेनों के अनावश्यक ठहराव की समस्या में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए भी मील का पत्थर सिद्ध होगी। विशेष रूप से सीमेंट उद्योग सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक तेज एवं सुगम हो सकेगी, जिससे माल परिवहन क्षमता में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
दोहरीकरण परियोजना के पूर्ण होने से रतलाम–नीमच–चित्तौड़गढ़ रेलखंड पूर्ण रूप से दोहरीकृत एवं विद्युतीकृत रेलखंड के रूप में विकसित हो गया है। इससे रेलवे की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी तथा भविष्य में यात्री एवं माल यातायात की बढ़ती मांग को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त इस परियोजना से क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी अधिक सुगम होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय व्यापार एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की संभावना है।
पश्चिम रेलवे द्वारा यह परियोजना यात्री सुविधा, संरक्षा एवं आधुनिक रेल अवसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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