


रतलाम 10 मई । जिला जेल रतलाम में बंदियों के सकारात्मक सुधार और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अनूठी पहल की गई है। जेल प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के समन्वय से अब जेल के भीतर बंदियों को न केवल कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि रिहाई के बाद उन्हें रोजगार से भी जोड़ा जाएगा।
जेल अधीक्षक श्री भदौरिया एवं जेलर श्री मकवाना के मार्गदर्शन तथा समाजसेवी सौरभ बोथरा के विशेष प्रयासों से आयोजित इस कार्यक्रम में ऋषभ इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अनुज छाजेड़ ने बंदियों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी ली है। श्री छाजेड़ ने घोषणा की कि बंदियों को जेल के भीतर ही हुनर सिखाया जाएगा ताकि सजा पूरी होने के बाद वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक आजीविका कमा सकें।
कार्यक्रम में दोस्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष महेंद्र बोथरा सहित अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। गौरतलब है कि बोथरा परिवार एवं फाउंडेशन द्वारा पूर्व में भी जेल में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आरओ प्लांट, एलईडी टीवी, गद्दे, चादर और ठंड में कंबलों का वितरण किया गया है। संस्था द्वारा मेडिकल कॉलेज और जेल में समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाते रहे हैं।
जेल अधीक्षक श्री भदौरिया ने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि जेल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सामाजिक संस्थाओं की सक्रियता कम होती है, ऐसे में बोथरा और छाजेड़ परिवार का यह कदम अन्य लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। जेलर श्री मकवाना ने टीम की तत्परता की प्रशंसा करते हुए कहा कि बंदियों के कल्याण हेतु यह समूह सदैव तैयार रहता है।
कार्यक्रम के दौरान सेवा भारती के जिलाध्यक्ष अनुज छाजेड़ एवं जैन दिवाकर श्री संघ के महेंद्र बोथरा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर स्वतंत्र पाटनी, कमल पाटनी, जितेंद्र गर्ग, राजेश गोयल सहित शहर के अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।