आत्मा के ज्ञान और शक्ति को गुरु के माध्यम से ही जागृत किया जा सकता है – राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश

बेंगलुरु विल्सन गार्डन ज्वेलर्स जैन स्थानक । संत आध्यात्मिक संस्कृति का प्राण, संस्कारों का भंडार और संस्कृति की रक्षा के लिए सजक प्रहरी की भांति होता है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने महासती चंदना जी की श्रद्धांजलि स्वरुप गुणानु वाद सभा को संबोधित करते कहा कि आत्मा के ज्ञान और शक्ति को गुरु के माध्यम से ही जागृत किया जा सकता है ।
उन्होंने कहा कि विश्व की संपूर्ण संपत्ति दान देकर भी एक संत का निर्माण नहीं किया जा सकता है विज्ञान और सरकार के वश की बात भी नहीं है जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। मुनि कमलेश ने बताया कि आज का विज्ञान भी ऋषि मुनियों की ज्ञान के आधार पर ही खोज कर रहा है ।
विश्व गुरु का सौभाग्य भी हिंदुस्तान को जो मिला है वह गुरुओं की देन है । गुरु को अनदेखा करना साक्षात परमात्मा का अपमान करने के समान है । राष्ट्र संत ने कहा कि जिसकी निगाहों में मिट्टी और सोना दोनों समान होता है वही सच्चा संत कहलाता है अभिशाप के बदले आशीर्वाद प्रदान करें निस्वार्थ भाव से साधना और परमार्थ करें ।
जैन संत ने कहा कि भौतिकवाद के माहौल में हमारे जैसे हजारों तपस्वी संतों का निर्माण होना यह आध्यात्मिक शक्ति का सबसे बड़ा चमत्कार है । अंत में कहा की महासती चंदन जी ने दीक्षा लेकर सर्दी गर्मी भूख प्यास की परवाह न करते हुए घर-घर गांव गांव में आध्यात्मिक ज्ञान के दीप जलाए । नशा मुक्ति नारी उत्थान हिंसा अंधविश्वास रूढ़िवाद के खिलाफ क्रांति करते हुए सन्मार्ग प्रदान किया द्यवह हमेशा हमेशा के लिए अमर हो गए अनंत काल तक उनका ज्ञान उनकी साधना आने वाली परी को मार्गदर्शन करती रहेगी।
संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता मीठालाल मकाना, रमेश खाबिया, प्रवीण कटारिया, मनीष खिवेसरा, सज्जन बोहरा, गौतम मकाना ने चंदना जी महाराज को श्रद्धांजलि जी प्रदान की।

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