रिंगनोद में धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का भव्य संगम

पूज्य डॉ. कुमुदलताजी म.सा. के प्रेरक प्रवचनों एवं अनुष्ठानों से श्रद्धालु हुए भावविभोर

रिंगनोद (जावरा)। स्थानक श्री संघ रिंगनोद की विनती को स्वीकार करते हुए अनुष्ठान आराधिका, ज्योतिष चंद्रिका पूज्य डॉ. श्री कुमुदलताजी म.सा. ठाणा-4 का रिंगनोद आगमन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं भक्ति भावना के साथ संपन्न हुआ। नगर प्रवेश के दौरान सकल जैन श्री संघ द्वारा भव्य अगवानी की गई। श्रद्धालुओं ने मंगल गीत, जयघोष के साथ पूज्य महासति जी का अभिनंदन किया, जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय बन गया।
स्थानीय श्री जैन दिवाकर कॉन्वेंट स्कूल में आयोजित भव्य धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूज्य महासति डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाते हुए अपने ओजस्वी प्रवचनों में संस्कारों, ज्योतिष, राशियों एवं आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कार ही मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं, जो व्यक्ति को श्रेष्ठ मार्ग की ओर अग्रसर करते हैं।
महासति जी ने अपने प्रवचन में गुरु दिवाकर के प्रेरणादायी जीवन चरित्र पर व्यापक प्रकाश डालते हुए गुरु महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाया कि किस प्रकार ग्रहों की चाल, राशियाँ और सकारात्मक ऊर्जा मानव जीवन को प्रभावित करती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि धर्म, साधना और संयम के मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को सुख, शांति और आत्मबल से परिपूर्ण बना सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु पूज्य महासति जी के गहन आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यंत प्रभावित हुए। उनके प्रवचन ने युवाओं एवं महिलाओं में विशेष जागृति का संचार किया।
इस अवसर पर स्वर सम्राज्ञी डॉ. श्री महाप्रज्ञाजी म.सा. ने अपने मधुर भजनों एवं अमृतवाणी से समूचे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर धर्मरस में डूब गए। वहीं डॉ. श्री पद्मकीर्तिजी म.सा. एवं श्री राजकीर्तिजी म.सा. के सान्निध्य में विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुए, जिनमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत गीत से हुआ, जिसे अंकिता कर्नावट ने प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण शीतल श्रीमाल द्वारा दिया गया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने महासति डॉ. कुमुदलताजी म.सा. के तप, त्याग, साधना एवं आध्यात्मिक जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। वहीं बसंत सिंह श्रीमाल ने गुरु दिवाकर के रिंगनोद पधारने की ऐतिहासिक स्मृतियों को साझा किया।
कार्यक्रम के अंत में स्थानक श्री संघ के अध्यक्ष अभय श्रीमाल ने सभी संत-साध्वी भगवंतों, अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सुंदर एवं प्रभावशाली संचालन पारस श्रीमाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक एवं श्रावीका उपस्थित थे।
पूरे आयोजन में धर्म, संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। पूज्य महासति डॉ. कुमुदलताजी म.सा. के प्रेरक उद्बोधन एवं अनुष्ठानों ने श्रद्धालुओं के मन में नई ऊर्जा, आस्था और आत्मविश्वास का संचार किया।

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