“जैन दिवाकर रत्न सम्मान” से विभूषित हुए समाज के प्रेरणापुंज वरिष्ठ श्रावक गण

मंदसौर, 16 जून । अखिल भारतीय श्री जैन दिवाकर संगठन समिति (रजि.) के प्रकल्प अनुसार समाज में धर्म, संस्कार, सेवा एवं मानवता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ एवं श्रद्धेय श्रावकों का “जैन दिवाकर रत्न सम्मान” के अंतर्गत सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया गया।
इस सम्मान श्रृंखला के अंतर्गत श्रद्धेय श्री आनंदीलाल दुग्गड़, श्री जवाहरलाल जैन, श्री भंवरलाल पामेचा, श्री ऋषभ कुमार मारू, श्री शांतीलाल संचेती, श्री हिरालाल पामेचा एवं श्री चांदमल जैन को उनके निवास स्थान पर जाकर सम्मानित किया गया।
विशेष रूप से, परम श्रद्धेय स्व. श्री सागरमल जैन संचेती, जिनका माह अप्रैल 2026 को देवलोकगमन हो गया था के पावन स्मरण में संगठन समिति के पदाधिकारी उनके निवास स्थान पर पहुंचे एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर भावभीनी शोक संवेदना व्यक्त की। स्व. संचेतीजी धर्मनिष्ठा, समाजसेवा, सदाचार एवं जिनशासन के प्रति अटूट समर्पण के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनके द्वारा धर्म प्रभावना, संस्कार संरक्षण एवं समाज उत्थान के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय योगदान के सम्मानस्वरूप मरणोपरांत “जैन दिवाकर रत्न सम्मान” प्रदान किया गया, जिसे उनके सुपुत्र श्री प्रसन्न जी संचेती ने विनम्रतापूर्वक ग्रहण किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी जनों ने दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति एवं उत्तम भव की मंगलभावनाएं व्यक्त करते हुए उनके पुण्यमय जीवन को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
संगठन समिति के पदाधिकारीगणों ने सभी सम्मानित वरिष्ठ श्रावकों को “जैन दिवाकर रत्न सम्मान-पत्र”, शाल एवं उपरणा भेंट कर उनका अभिनंदन किया तथा उनके श्रीचरणों में विनम्र श्रद्धा निवेदित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
यह सम्मान उन विभूतियों को जिन्होंने जैन दिवाकर जी महाराज के मुखारविंद से गुरु आमना, दर्शन, वंदन, सानिध्य, प्रवचन एवं सेवा का अवसर प्राप्त किया तथा धर्म प्रभावना, समाज सेवा, सदाचार, संस्कार संरक्षण एवं मानवीय मूल्यों के संवर्धन हेतु उनके दीर्घकालीन, प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय योगदान के सम्मान स्वरूप प्रदान किया गया।
अखिल भारतीय श्री जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सी.ए. डॉ. आई. एम. सेठिया, राष्ट्रीय महामंत्री श्री राकेश मेहता, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री संतोष चोपड़ा, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री जयंतीलाल डांगी एवं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री श्री सिद्धराज संघवी ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि सम्मानित सभी वरिष्ठ श्रावकों का जीवन त्याग, सेवा, धर्मनिष्ठा एवं सामाजिक समर्पण का अनुपम उदाहरण है। उनके आदर्शों एवं जीवन मूल्यों से समाज की नई पीढ़ी को सतत प्रेरणा प्राप्त होती है तथा धर्म और संस्कारों के प्रति जागरूकता का प्रसार होता है।
संगठन समिति के पदाधिकारियों ने सभी सम्मानित महानुभावों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर धर्म-सेवा में सक्रिय रहने की मंगलकामना करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्व समाज की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका स्नेह, मार्गदर्शन एवं अनुभव समाज को सदैव नई दिशा प्रदान करता रहेगा।
इस अवसर पर संगठन समिति के राष्ट्रीय संरक्षक श्री अशोक मारू, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य श्री नरेंद्र मारू सहित संगठन समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर सम्मानित महानुभावों के परिवारजनों ने उपस्थित सभी अतिथियों एवं संगठन पदाधिकारियों का आत्मीय स्वागत-सत्कार कर आभार व्यक्त किया।
“जिनशासन की प्रभावना, संस्कारों की साधना और समाज सेवा की प्रेरणा को समर्पित ‘जैन दिवाकर रत्न सम्मान’ वास्तव में उन व्यक्तित्वों के प्रति समाज की कृतज्ञता का विनम्र अभिनंदन है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन धर्म और समाज के उत्थान हेतु समर्पित किया है।”