
रतलाम। पट्टाभिषेक कार्यक्रम में संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में ‘संत आचार संहिता एवं मार्गदर्शिका’ पुस्तक का विमोचन संपन्न हुआ। श्री सनातन धर्म सभा एवं महारूद्र यज्ञ समिति की ओर से रचित इस पुस्तक का विमोचन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री 1008 महंत श्री रविन्द्र पुरी जी महाराज, द्वारा करते हुए कहा कि इसमें किसी भी धार्मिक आयोजन में आमंत्रित साधु-संतों के प्रति अपेक्षित सम्मान, व्यवहार एवं व्यवस्थाओं का विस्तृत एवं व्यावहारिक वर्णन किया गया है। यह आज की वर्तमान पीढ़ी को जानने के लिये आवश्यक है।
अपने आर्शिवचन मे चारधाम आश्रम उज्जैन एवं निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी श्री शांति स्वरूपानंद जी महाराज, पंचायती निरंजनी अखाड़ा द्वारा कहा गया की संत-महात्माओं के आमंत्रण, स्वागत-सम्मान, आगमन-प्रस्थान, आवास, भोजन एवं अन्य व्यवस्थाओं के सुव्यवस्थित संचालन हेतु इस आचार संहिता एवं मार्गदर्शिका की सराहनीय प्रस्तुती की गई है।
पुस्तिका का विमोचन सचिव महंत श्री राम रतन जी सराहनीय महाराज, 1008 निरंजनी अखाड़ा महामंडलेश्वर श्री वैराग्यानंद जी (मिर्ची बाबा) महाराज, बड़ा रामद्वारा, जोधपुर के रामस्नेही श्री हरीराम शास्त्री जी महाराज, दंडी स्वामीमठ के श्री आत्मानंद जी सरस्वती, अखंड आश्रम के मंडलेश्वर श्री देवस्वरूपानंद जी के द्वारा अन्य अनेक संतों एवं साध्वीजन की उपस्थिति में किया गया।
इस अवसर पर पुस्तिका के लेखक श्री सनातन धर्म सभा एवं महारूद्र यज्ञ समिति अध्यक्ष श्री अनिल झालानी संक्षेपिता प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह पुस्तक भविष्य में प्रतिदिन होने वाले धार्मिक आयोजकों के सफल एवं अनुशासित संचालन के आयोजनों के लिये अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध होगी।
पुस्तक के संपादन कर्ता महर्षि श्री शिवशंकर जी दवे द्वारा पुस्तिका के प्रकाशन के उद्देश्य व आवश्यकता बताते हुए अपनी प्रस्तावना मे कहा कि यह पुस्तिका सनातन समाज मे संतो के प्रति आदर का भाव प्रकट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमीजन, समाजजन एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।