251वें मंगलवार पर भक्ति, संस्कार और परिवार भाव का अद्भुत संगम : 251 से अधिक परिवारों की उपस्थिति में सेवावीर परिवार का भव्य आयोजन सम्पन्न

रतलाम। सेवावीर परिवार द्वारा प्रति मंगलवार आयोजित सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ की पावन श्रृंखला के 251वें मंगलवार पर मंगलवार रात्रि चम्पाविहार में एक भव्य, भावपूर्ण और संस्कारमयी आयोजन सम्पन्न हुआ। रात्रि 8 बजे से 11 बजे तक चले इस दिव्य आयोजन में 251 से अधिक परिवारों की श्रद्धामयी उपस्थिति ने पूरे परिसर को भक्ति, उत्साह और पारिवारिक एकता के भाव से ओतप्रोत कर दिया।
आयोजन का शुभारंभ श्री हनुमान जी महाराज एवं श्री दिव्य गदा जी के अभिषेक से हुआ। इसके पश्चात सवा ग्यारह किलो सिंदूर द्वारा हनुमान जी के 1008 नामों से अर्चन किया गया। इसी सिंदूर को समापन पर अभिमंत्रित प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया गया, जिसे भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा और भाव के साथ ग्रहण किया।
अर्चन के पश्चात कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, मानस मर्मज्ञ आचार्य श्री श्याम जी मनावत का आत्मीय स्वागत किया गया। स्वागत उपरांत सेवावीर पाठशाला के बाल सेवावीरों ने मंच संभाला और अपने अभ्यास किए हुए मंत्र, चौपाइयों एवं श्लोकों का अत्यंत प्रभावशाली उच्चारण प्रस्तुत किया। उनकी ओजस्वी एवं संस्कारपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित भक्तों का मन मोह लिया और प्रस्तुति समाप्त होते ही तालियों की गूंज से पूरा परिसर गूंज उठा।
उल्लेखनीय है कि सेवावीर परिवार द्वारा संचालित यह दैनिक पाठशाला पिछले दो वर्षों से अधिक समय से निरंतर चल रही है, जिसमें 2 वर्ष से 16 वर्ष तक के बच्चे सम्मिलित होकर प्रातः जागरण से लेकर रात्रि विश्राम तक के दैनिक जीवन में किए जाने वाले मंत्रों, प्रार्थनाओं और संस्कारों का विधिवत अभ्यास करते हैं। इस अवसर पर सेवावीर परिवार ने समाजजनों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों और बस्तियों में भी ऐसी पाठशालाओं के संचालन में सहयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ी धर्म, संस्कृति और श्रेष्ठ संस्कारों से पोषित हो सके।
बाल सेवावीरों की प्रस्तुति के पश्चात आचार्य श्री श्याम जी मनावत ने अपना प्रेरणादायी उद्बोधन दिया। उन्होंने रामायण को आधार बनाते हुए परिवार के रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए अत्यंत मार्मिक दृष्टांत प्रस्तुत किए। अपने उद्बोधन में उन्होंने सेवक की भूमिका, भक्त और भगवान का संबंध, माता-पिता एवं पुत्रों के कर्तव्य, पति-पत्नी के परस्पर भाव, भाई-बहन के स्नेह, तथा भाई के प्रति भाई की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। उनके उद्बोधन ने उपस्थित परिवारों को केवल भावविभोर ही नहीं किया, बल्कि परिवार को जोड़ने, समझने और निभाने का एक सशक्त संदेश भी दिया।
अपने वक्तव्य में आचार्य मनावत ने “मेरे घर आएंगे मिट्टी के गणेश” अभियान का भी उल्लेख किया और सेवावीर परिवार द्वारा समाज, धर्म और संस्कारों के क्षेत्र में किए जा रहे विविध सेवा कार्यों की सराहना की।
उद्बोधन के पश्चात सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ अत्यंत श्रद्धा और भाव के साथ सम्पन्न हुआ। इसके बाद भक्तों द्वारा सामूहिक अर्जी लगाई गई तथा “मेरे घर आएंगे मिट्टी के गणेश” अभियान को लेकर सामूहिक संकल्प भी लिया गया।
आयोजन स्थल पर लगाई गई विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें सेवावीर परिवार द्वारा अब तक किए गए धार्मिक, सामाजिक और सेवा कार्यों की झलकियों को सुसज्जित रूप में प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने उपस्थित जनसमूह को सेवावीर परिवार की साधना, सेवा और संस्कार यात्रा से भावनात्मक रूप से जोड़ा।
कार्यक्रम का समापन आरती एवं जयकारों के साथ हुआ। अंत में पधारे समस्त अतिथियों, श्रद्धालुओं और परिवारजनों के प्रति सेवावीरों ने आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कार, सेवा और पारिवारिक एकता का जीवंत उत्सव बनकर उपस्थित जनसमूह के हृदय में गहरी छाप छोड़ गया।

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