29 जून को महाआरती, पूर्णाहुति एवं महाप्रसादी (भंडारा) का होगा आयोजन

जावरा (अभय सुराणा) । शास्त्री कॉलोनी स्थित श्री साँवलिया सेठ मंदिर में आयोजित 21वें वर्षगाँठ महोत्सव के अंतर्गत चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का दिव्य प्रसंग अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कथा स्थल पर प्रस्तुत श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की मनोहारी झांकी एवं गरबा-रास ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर राष्ट्रसंत नमन जी वैष्णव (तालिदाना गौशाला धाम), क्रांतिकारी प्रवक्ता मनोज जी कश्यप (शेरपुर) एवं भागवताचार्य विनोद जी शर्मा (भदवासा) सहित अनेक संत-महात्माओं एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। भागवताचार्य पं. पवन जी शास्त्री ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि भगवान सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराज पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी, उसी प्रकार जब-जब भक्तों पर संकट आता है, तब-तब भगवान विभिन्न रूपों में उनकी रक्षा के लिए अवतरित होते हैं।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी सजाई गई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ गरबा-रास कर भक्ति का आनंद लिया, जो पूरे आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। कार्यक्रम में अनिल दसौड़ा, तालिदाना गौशाला अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह “गज्जू बना”, तालिदाना गौशाला के सदस्य, जुगल सैनी, गोपाल सेठिया, सुभाष पांचाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर रुक्मिणी विवाह महोत्सव में सहभागिता कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
कथा में परीक्षित के रूप में कैलाशसिंह परिहार विराजमान रहे। मुख्य यजमान के.एन. कुमावत, मोहनलाल सोनी एवं सोनी परिवार रहे। पुलिस कॉलोनी की मातृशक्ति ने सामूहिक रूप से पोथी पूजन का लाभ प्राप्त किया। प्रसादी का लाभ स्वर्गीय द्वारकादास बैरागी की पुण्य स्मृति में बैरागी परिवार द्वारा लिया गया।
सायंकालीन आरती में जानकीलाल लाल (सूरत वाले), गजेन्द्रसिंह गज्जू बना, दादू बना, दीपक त्रिवेदी, अम्बाशंकर शिकारी, निलेश जोशी, अभय श्रीवास्तव, महेंद्र धाकड़, रामसेवक शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मंदिर समिति के सचिव रामचंद्र पाटीदार ने किया।
श्री शिवशक्ति मारुति एवं श्री साँवलिया सेठ मंदिर समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण जोशी ने बताया कि वर्षगाँठ महोत्सव के समापन अवसर पर 29 जून को श्री साँवलिया सेठ की महाआरती, यज्ञ की पूर्णाहुति तथा महाप्रसादी (भंडारा) का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सपरिवार उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।