मेनका गांधी के विवादित बयान पर जैन समाज का कानूनी एक्शन, IPC की धाराओं के तहत नोटिस भेजा

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी द्वारा दिगंबर जैन संतों पर लगाए गए आरोपों को लेकर जैन समाज ने कड़ा रुख अपनाया है। मेनका गांधी पर आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि “जैन संत मोरो की हत्या कर उसके पंखों से पिच्छी बनाते हैं”।
जैन समाज के वरिष्ठ समाज पदाधिकारिय डॉ जैनेन्द्र जैन,मंयक जैन राजेश जैन दद्दू टीके वेद हंसमुख गांधी आनंद नवीन गोधा एवं महिला परिषद् की संभागीय अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन ने इसे असत्य, निराधार, भ्रामक और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताते हुए अधिवक्ता के माध्यम से रजिस्टर्ड कानूनी नोटिस भेजा है। दद्दू ने बताया कि नोटिस में लगाई गईं ये धाराएं:

  1. IPC धारा 295A: किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाना।
  2. IPC धारा 499/500:के/ मानहानि – जैन धर्म, संस्कृति एवं संतों और समस्त जैन समाज की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाना।
  3. IT Act की धारा 66E/67 यदि बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है तो गोपनीयता भंग व आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के तहत।

मंयक जैन ने कहा कि नोटिस की मुख्य बातें:

  1. नोटिस में कहा गया है कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत ‘अहिंसा परमो धर्मः’ है। दिगंबर मुनि जिस पिच्छी का प्रयोग करते हैं वह प्राकृतिक रूप से गिरे मोर पंखों से बनती है। किसी जीव की हत्या जैन धर्म में पूर्णतः निषिद्ध है।
  2. “15 लाख मोरों की हत्या” का आरोप तथ्यहीन है और इससे जैन समाज की छवि धूमिल हुई है।
  3. मेनका गांधी को 7 दिवस के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने और बयान वापस लेने को कहा गया है।
  4. जवाब संतोषजनक न मिलने पर आपराधिक व सिविल मानहानि का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी गई है।

नोटिस प्रेषक: मयंक जैन पिता अशोक जैन निवासी- 38 वर्धमान नगर, , मोबा- 8976729663
अभिभावक नियुक्त: महेन्द्र जैन पिता विजय, पता- शिवपुरी, म0प्र0

जैन समाज का पक्ष:जैन समाज के पदाधिकारियों एवं विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ का कहना है कि संतों पर हिंसा का आरोप करोड़ों अनुयायियों की आस्था पर सीधा प्रहार है।

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