
रतलाम। महर्षि परशुराम ब्राह्मण सहकारी साख संस्था मर्यादित रतलाम कार्यालय पर विगत् 07 माह से निरन्तर प्रति रविवार हो रही श्री राम अमृत प्रवचन कि पूर्णाहूति पर श्री श्री दण्डी स्वामी आत्मानंद जी महाराज ने कही।
कथा के आरंभ में गुरुदेव ने हरि अनंता हरि कथा अनंता कहहि सुनहि बहु विधि सर्व संता इस प्रसंग को विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि हर कल्प में प्रभु श्रीराम एवं सीता के अवतारों के अवतरण के कारणों का भिन्न भिन्न उल्लेख किया। इसी के साथ श्री गुरुदेव ने दशरथ – जनक जी एवं राजा नीमि के अवतारों का भी वर्णन किया। गुरुदेव भगवान ने जग जननी सीता के शक्ति अवतार का वर्णन एवं महिरावण का वध एवं उसके उद्धार का वर्णन किया।
आपने बताया ने कि सनातन धर्म ने सदैव महिला शक्ति का सम्मान किया है प्रभु श्रीराम ने भी मां सीता के शक्ति स्वरूप की स्तुति की थी और उनसे वरदान भी प्राप्त किया अंत में गुरुदेव ने राम के महाप्रयाण का वर्णन किया और बताया कि राम ने लक्ष्मण ,भरत शत्रुघ्न,सुग्रीव एवं अयोध्यावासियों सहित साकेत धाम प्रयाण किया। अंत आपने श्रीराम कथा के माध्यम एक पवित्र संदेश दिया कि हम अपने ज्ञान शरीर संगठन – शक्ति-सत्ता – माया के वशिभूत होने के कारण स्वयं को मठाधीश समझ लेते हैं। किन्तु इस पद के अंहकार में सबके साथ दुराचरण करते हैं और अगले जन्म में उसे श्वान रुपी जन्म लेकर हमको वह सभी भोगना पड़ेगा। श्रीराम कथा की पूर्णाहुति होने के पश्चात भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। महर्षि परशुराम ब्राह्मण सहकारी साख संस्था मर्यादित रतलाम अध्यक्ष पं संदीप व्यास ,पं. राजेन्द्र कुमार जोशी,पं. संजय दवे,पं. नवनीत मेहता,पं. सुनील शर्मा,पं. नीरज शर्मा,पं. सुनील गौतम,पं. अविनाश मिश्रा,पं. जितेन्द्र मोहन शर्मा मैथिली ब्राह्मण अध्यक्ष,पं. मदन मोहन उपाध्याय,पं. सुनील शर्मा बागड़ा ब्राह्मण समाज अध्यक्ष,पं. राजेश व्यास,पं. सत्येन्द्र जोशी,पं. खुबीराम शर्मा,पं. संजीव शर्मा,पं. विजय हेमकांत शर्मा ,पं. सौरभ शर्मा,पं. सत्यनारायण पालीवाल,श्रीमती नीतू व्यास,श्रीमती रजनी व्यास, श्रीमती सरोज जोशी, श्रीमती अनुराधा दवे, श्रीमती सीमा जोशी, श्रीमती अनुसुइया जोशी, श्रीमती आभा शर्मा आदि सहित समाजजन उपस्थित थे इस अवसर पर संस्था द्वारा गुरुदेव का अभिनंदन किया गया और आगामी रविवार से श्रीमद भागवत कथा प्रवचन का निवेदन किया जिसे गुरुदेव ने स्वीकृति दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ मुनिन्द्र दुबे और आभार व्यक्त पं. अजय कुमार जोशी ने किया