जीवन के सूर्यास्त के बाद भी रोशन कर गए दो जिंदगियां, शतायु कन्हैयालाल छाजेड़ का नेत्रदान बना मानवता की मिसाल

शोक की घड़ी में छाजेड़ परिवार का अनुकरणीय निर्णय, लायंस क्लब जावरा ने किया सम्मानित

जावरा (निप्र)। इंसान यदि चाहे तो अपने जीवन के अंतिम पड़ाव के बाद भी समाज के लिए अमिट प्रेरणा छोड़ सकता है। जावरा के प्रतिष्ठित छाजेड़ परिवार (मडावदा वाला) ने ऐसा ही अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मानवता की ऐसी मिसाल कायम की है, जिसकी पूरे नगर में सराहना हो रही है।
लायंस क्लब जावरा के सचिव संदीप रांका ने बताया कि जावरा के शतायु वरिष्ठ नागरिक स्वर्गीय कन्हैयालाल जी छाजेड़ ने अपने जीवन के 100वें वर्ष में दो माह पूर्व ही प्रवेश किया था। उनके अरिहंत शरण (स्वर्गवास) के बाद शोकाकुल वातावरण में भी परिवार ने एक साहसिक एवं प्रेरणादायी निर्णय लेते हुए उनकी दोनों आंखों का मरणोपरांत नेत्रदान कराया।
दिवंगत के पुत्र कैलाशचंद्र छाजेड़ तथा पौत्र शैलेश, निलेश, अंकित, दीपेन्द्र एवं दिव्य छाजेड़ ने सामाजिक रूढ़ियों से ऊपर उठकर नेत्रदान का संकल्प लिया। लायंस क्लब जावरा के माध्यम से लायंस नेत्र चिकित्सालय की टीम ने समय पर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
स्वर्गीय कन्हैयालाल जी छाजेड़ के इस महादान से अब दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में फिर से उजाला लौट सकेगा। वे इस सुंदर संसार को अपनी आंखों से देख सकेंगे। उनका यह प्रेरक कार्य समाज के लिए मानव सेवा और परोपकार का जीवंत संदेश बन गया है।
छाजेड़ परिवार के इस मानवीय और साहसिक निर्णय पर लायंस क्लब जावरा ने गहरा सम्मान व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। क्लब अध्यक्ष सुधीर जैन, कोषाध्यक्ष विपिन चौरड़िया, पूर्वाध्यक्ष अनिल धारीवाल, यश जैन, सह-कोषाध्यक्ष कमल सारडा, डॉ. राकेश जैन सहित अन्य पदाधिकारी दिवंगत के निवास पहुंचे और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
इस अवसर पर लायंस क्लब जावरा की ओर से छाजेड़ परिवार को ‘नेत्रदान प्रमाण-पत्र’ भेंट कर उनके इस महान एवं प्रेरणादायी निर्णय के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
लायंस क्लब के पदाधिकारियों ने कहा कि शोक की कठिन घड़ी में भी समाजहित को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान जैसा महादान करना वास्तव में मानवता की सर्वोच्च सेवा है। छाजेड़ परिवार का यह निर्णय पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और अधिक से अधिक लोगों को मरणोपरांत अंग एवं नेत्रदान के लिए प्रेरित करेगा। पूरे नगर में इस प्रेरक कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Play sound