त्रिवेणी रोपण महाअभियान को जन-जन का पुनीत सेवा कार्य बनाने का संकल्प, विप्रबंधुओं की विशेष बैठक सम्पन्न

रतलाम। वैदिक सनातन संस्कृति में प्रकृति को परमात्मा का साकार स्वरूप एवं वृक्षों को देवतुल्य माना गया है। इसी दिव्य भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से त्रिवेणी रोपण महाअभियान के अंतर्गत रतलाम के समीप भाई-बहन की पहाड़ी पर एक विशाल त्रिवेणी वन क्षेत्र का निर्माण किया जा रहा है। इसी संदर्भ में अखिल भारतीय पुजारी महासंघ, वैदिक जागृति ज्ञान-विज्ञान पीठ एवं ज्योतिष शिक्षण एवं जनकल्याण समिति के पदाधिकारियों की एक विशेष बैठक स्थानीय कालिका माता मंदिर परिसर स्थित श्रीराम मंदिर में सम्पन्न हुई।
बैठक में उपस्थित सभी विप्रबंधुओं ने हर्ष एवं उत्साह के साथ इस महाअभियान को जन-जन का पुनीत सेवा कार्य बनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने वैदिक सनातन परम्परा में पीपल, वट एवं नीम की त्रिवेणी के आध्यात्मिक, धार्मिक, पर्यावरणीय तथा औषधीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पं. मुकेश शर्मा ने कहा कि त्रिवेणी रोपण केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि प्रकृति की आराधना, पर्यावरण संरक्षण, सनातन संस्कृति के संवर्धन तथा भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का एक दिव्य संकल्प है। प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी का यह नैतिक एवं धार्मिक दायित्व है कि वह इस पुनीत सेवा कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करे।
बैठक में निर्णय लिया गया कि समाज में व्यापक जनजागरण कर अधिक से अधिक लोगों को अपने दिवंगत पितरों की पुण्य स्मृति, जन्मोत्सव, विवाह वर्षगांठ एवं अन्य शुभ अवसरों पर त्रिवेणी रोपण हेतु प्रेरित किया जाएगा। साथ ही नगर के विभिन्न मंदिरों के माध्यम से विप्रबंधु समाज को इस अभियान से जोड़ते हुए इसे लोककल्याण, पर्यावरण संरक्षण एवं धर्मसेवा का जन अभियान बनाया जाएगा।
बैठक में पर्यावरण प्रेमी एवं पर्यावरणविद् आदरणीय अशोक जी पाटीदार तथा समाजसेवी आदरणीय पंकज जी भाटी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने त्रिवेणी वन निर्माण की रूपरेखा, पर्यावरणीय लाभ तथा समाज की सक्रिय सहभागिता के महत्व पर विस्तार से जानकारी प्रदान की।
बैठक में वैदिक जागृति ज्ञान-विज्ञान पीठ के पीठाधीश्वर महर्षि संजय चैतन्य ब्रह्मचारी, पं. मुकेश शर्मा (जिला अध्यक्ष, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ, रतलाम), अंकित राव (नगर अध्यक्ष, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ, रतलाम), पं. महेशानंद शास्त्री, पं. दक्ष शर्मा, पं. राजेश शर्मा, पं. भोश शर्मा, पं. हेमंत दवे, पं. नंदकिशोर व्यास, पं. जितेंद्र शिकारी, पं. आशीष मिश्रा, पं. चेतन शर्मा तथा पं. संजय मिश्रा सहित अनेक विप्रबंधुओं ने अपने आध्यात्मिक विचार व्यक्त किए।
बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि “एक व्यक्ति–एक त्रिवेणी, एक परिवार–एक त्रिवेणी” के भाव को जन-जन तक पहुँचाकर रतलाम को हरित, स्वच्छ, आध्यात्मिक एवं पर्यावरण-संपन्न बनाने के इस महापुण्य अभियान को व्यापक जनसहभागिता से सफल बनाया जाएगा।

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