जैन दिवाकर महिला मंडल एवं अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन ने दिव्यांग बच्चों संग मनाया आनंदोत्सव

45 बेडशीट व 4 ड्राईशीट भेंट कर सेवा, संवेदना और अपनत्व का दिया संदेश

जावरा/पिपलोदा 23 जुलाई (अभय सुराणा)। सेवा, संवेदना और सामाजिक सरोकार की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत करते हुए जैन दिवाकर महिला मंडल, जावरा एवं अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के संयुक्त तत्वावधान में पिपलोदा स्थित जिला दिव्यांग (मुखबधिर) छात्रावास में दिव्यांग बच्चों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक “आनंदोत्सव” मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को 45 बेडशीट एवं 4 ड्राईशीट भेंट कर उनके प्रति आत्मीयता और सामाजिक दायित्व का परिचय दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात शर्मिला चत्तर, अनीता झामर एवं पुष्पा चापड़ोद ने स्वागत प्रार्थना प्रस्तुत की।
आयोजन के दौरान छात्रावास में अध्ययनरत दिव्यांग बच्चों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बेडशीट एवं ड्राईशीट वितरित की गई। जैन दिवाकर महिला मंडल द्वारा बच्चों को पौष्टिक नाश्ता भी कराया गया। पूरे कार्यक्रम में बच्चों के साथ आत्मीय संवाद, स्नेहिल मुलाकात और अपनत्व का वातावरण बना रहा। आयोजन का उद्देश्य केवल सामग्री वितरण नहीं, बल्कि दिव्यांग बच्चों के मन में आत्मविश्वास, सम्मान और अपनत्व की भावना को सुदृढ़ करना था।
मुख्य अतिथि राजकुमार हरण ने अपने उद्बोधन में कहा कि “मानव सेवा का वास्तविक स्वरूप तभी साकार होता है, जब समाज के जरूरतमंद और विशेष बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाई जाए। आनंदोत्सव का उद्देश्य केवल उपहार देना नहीं, बल्कि प्रेम, अपनत्व और संवेदनाओं का उपहार देना है।”
विशिष्ट अतिथि एवं जैन दिवाकर महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती ललिता नांदेचा ने कहा कि समाज के प्रत्येक सक्षम व्यक्ति का दायित्व है कि वह सेवा के ऐसे कार्यों में अपनी सहभागिता निभाए। मंडल की सचिव श्रीमती पुष्पा चापड़ोद एवं कोषाध्यक्ष श्रीमती वर्षा चत्तर ने भी सेवा कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। विशेष अतिथि महेश जैन ने भी सेवा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
छात्रावास परिवार की ओर से गायत्री कुंवर, लता गोस्वामी, अजयपाल सिंह एवं कमलेश सूर्यवंशी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर खुशी परिहार के मार्गदर्शन में मुखबधिर छात्रों ने प्रार्थना एवं मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति दी। बच्चों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित सभी अतिथियों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिला कोषाध्यक्ष अनिल श्रीश्रीमाल एवं आनंदीलाल लोढ़ा मंचासीन रहे। सहायक वार्डन कन्हैयालाल बोस ने स्वागत भाषण दिया तथा
छात्रावास के वार्डन अंबाराम बोस की संपूर्ण कार्यक्रम में विशेष एवं सराहनीय भूमिका रही। उनके कुशल मार्गदर्शन एवं समन्वय में पूरे आयोजन की सुव्यवस्थित तैयारियाँ की गईं। उन्होंने अतिथियों को छात्रावास की व्यवस्थाओं, बच्चों की दिनचर्या एवं आवश्यकताओं से अवगत कराया तथा कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं गरिमामय संचालन कर आयोजन को यादगार बना दिया। अंत में जैन दिवाकर महिला मंडल की सचिव पुष्पा चापड़ोद ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान मंजू हरण एवं सुमन लोढ़ा ने बच्चों को टॉफियां वितरित कीं। छात्रावास की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं से प्रभावित होकर सुनीता पोखरना एवं ज्योति चापड़ोद ने छात्रावास के कर्मचारियों के प्रोत्साहन हेतु ₹2,000 की सहयोग राशि भेंट की। वहीं दोनों संस्थाओं के अध्यक्ष राजकुमार हरण एवं ललिता नांदेचा ने छात्रावास की आवश्यकता के अनुरूप शीघ्र ही बैठने के लिए कुर्सियां उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के अंत में छात्रावास परिवार ने दोनों संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सेवा और संवेदना से जुड़े आयोजन दिव्यांग बच्चों के जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और अपनत्व का संचार करते हैं।
इस अवसर पर इन्दिरा नाहर, ललिता श्रीश्रीमाल, प्रेमलता ओरा, अनीता चापड़ोद, सुधा छाजेड़, सीमा सियार, सविता कोचट्टा, सुनिता कोचट्टा, कुसुम चत्तर, मधु रांका, सरला रांका, स्नेहलता भटेवरा, रेणु डांगी, श्यामा कोचट्टा, मधु भण्डारी, अंजना भण्डारी, प्रेमलता ओस्तवाल, सुनिता मेहता एवं मंजू चोरड़िया सहित बड़ी संख्या में महिला मंडल एवं संगठन के सदस्य उपस्थित रहे।

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