“मंदिर की सीमा मत बाँधो, धर्म को असीम कर दो” : मुनि सुधा सागर जी

इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। दलाल बाग में विराजित श्रमण निर्यापक मुनि श्री 108 सुधा सागर जी महाराज ने धर्म-सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि गुण-पर्याय हमें आनंद नहीं देगी, द्रव्य-पर्याय हमें आनंद देगी। आत्मा ही मालिक है, आत्मा ही राजा है और अनंत गुण एवं अनंत पर्याय उसकी प्रजा हैं। जीव स्वयं राजा है।

विज्ञान vs जैन धर्म
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरुदेव ने कहा कि विज्ञान कितना विनाश करने के बाद हमें सुख दे पाता है, लेकिन हमारा जैन धर्म किसी का विनाश नहीं करता, किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता। बल्कि यह तुम्हारी आत्मा का उद्धार करता है। उन्होंने कहा मंदिर की सीमा मत बाँधो, धर्म को असीम कर दो और पाप को सीमित कर दो।

शिखरजी का संकल्प
श्री सम्मेद शिखरजी की वंदना के संदर्भ में गुरुदेव ने कहा शिखरजी से लौटते समय यह संकल्प लेकर आना कि “मैं मरने से पहले एक बार फिर शिखरजी आऊँगा।” यदि आपने भगवान के सामने शिखरजी के return reservation का संकल्प ले लिया है, तो मृत्यु कहीं भी हो, वह भी शिखरजी यात्रा का पुण्य लेकर होगी।

माँ और गुरु का सम्मान
मुनि श्री ने कहा “माँ और गुरु के सामने ‘क्यों’ नहीं, ‘जी’ कहना सीखो।” माँ और गुरु के सामने कभी “क्यों, लेकिन, परंतु” मत कहना। ये दोनों कभी भी तुम्हारी शक्ति से बाहर का आदेश नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा हमने उन माँ-बाप को रोते हुए देखा है जो बच्चों की इच्छा पूरी नहीं कर पाए, लेकिन सुधा सागर को ऐसे बेटे चाहिए जो माँ-बाप की इच्छा पूरी न कर पाने पर रो पड़ें।”

आज के दो होमवर्क
मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को दो होमवर्क दिए:
पहला होमवर्क :
अगर माँ का चेहरा उतरा हुआ हो तो पूछो – “माँ क्या इच्छा है?” हो सकता है वे चातुर्मास का कलश लेना या मंदिर बनवाना चाहती हों। फिर चिंतन करो कि बेटा, बहू और पोते-पोतियों का जवाब क्या होगा?
दूसरा होमवर्क : घर जाकर माँ से 2 मिनट पूछो – “माँ, जब मैं गर्भ में था तब आपने मेरे लिए क्या सपने देखे थे?” उनकी आँखों में देखकर सुनो।

चातुर्मास का उद्देश्य
मुनि श्री ने कहा यदि 4 महीने में इंदौर के बच्चे माँ-बाप की उस कल्पना के अनुसार बन जाएं जैसी कल्पना जन्म से पहले की थी, तो मेरा चातुर्मास सफल हो जाएगा।
उन्होंने कहा हर कोई सोच रहा है महाराज की इच्छा पूरी होगी, लेकिन इस चातुर्मास में यह भी चिंतन करो – “महाराज की क्या इच्छा है? वे इंदौर वालों से क्या चाहते हैं?”*

अंत में गुरुदेव ने कहा माँ, बाप और गुरु कलयुग में बच्चे से वही इच्छा करते हैं जिसे पूरा करने में वह समर्थ हो। आवश्यकता है उनकी इच्छाओं को समझने, सम्मान देने और पूरा करने की। धर्म सभा में आकाश कोल आनंद नवीन गोधा राजेश जैन दद्दू पवन चैलेंजर श्रुत जैन निलेश जैन अशोक डोसी अखिलेश सोधीया सपना मनीष गोधा सोनाली बागढीया आदि समाज जन उपस्थित थे।

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