
रतलाम। नेत्रदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंदों के जीवन में रोशनी लाने के उद्देश्य से कार्यरत नेत्रम संस्था के प्रयासों से बीते दिनों रतलाम में 5 नेत्रदान सम्पन्न हुए। इन नेत्रदानों से प्राप्त कॉर्निया के माध्यम से 10 दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में उजियारा आने की उम्मीद है।
नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत ने बताया कि पहला नेत्रदान दीनदयाल नगर निवासी स्व. पुखराज लोढ़ा की धर्मपत्नी श्रीमती चेतना लोढ़ा के असामयिक निधन के पश्चात हुआ। संदीप लोढ़ा नाकोड़ा की प्रेरणा से उनके पुत्र निपुण लोढ़ा ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की।
दूसरा नेत्रदान धानमंडी निवासी स्व. रामचन्द्र तिवारी के सुपुत्र गोपाल तिवारी पहलवान के असामयिक निधन के पश्चात हुआ। सुशील ‘मीनू’ माथुर ,संजय पटेल की प्रेरणा से उनके भाई लोकपाल, राजपाल एवं नारायण तिवारी ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की।
तीसरा नेत्रदान टाटानगर निवासी गोपाल राठौड़ के असामयिक निधन के पश्चात हुआ। गोपाल राठौड़ पतरा वाला एवं दिनेश राठौड़ की प्रेरणा से भतीजे प्रहलाद राठौड़ ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की।
चौथा नेत्रदान लक्कड़पीठा निवासी स्व. रतनलाल वोहरा, खरसोद कला वाले, की धर्मपत्नी श्रीमती शांताबाई वोहरा के असामयिक निधन के पश्चात हुआ। प्रितेश गादिया एवं हेमन्त मूणत की प्रेरणा से उनके पुत्र पारस, महेन्द्र एवं आशीष वोहरा ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की।
पांचवां नेत्रदान ग्राम नगरा निवासी बसंतीलाल राठौड़ के असामयिक निधन के पश्चात हुआ। गोपाल राठौड़ पतरा वाला एवं प्रकाश राठौड़ दातार की प्रेरणा से पुत्र संतोष, अंकित एवं आशीष देवा ने नेत्रदान की सहमति प्रदान की।
उक्त सभी नेत्रदान गीता भवन न्यास, बड़नगर के डॉ. जी.एल. ददरवाल एवं डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज के राजवंत सिंह, विनोद कुशवाह एवं भावना खन्ना द्वारा सम्पन्न किए गए। मेडिकल कॉलेज से मृतकों के निवास तक टीम को लाने-ले जाने की व्यवस्था यशवंत पावेचा के निजी वाहन से की गई।
नेत्रदान के दौरान हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, नवनीत मेहता, शीतल भंसाली, शलभ अग्रवाल, सुशील ‘मीनू’ माथुर, गिरधारीलाल वर्धानी, गोपाल राठौड़ पतरा वाला, यशवंत पावेचा, भगवान ढलवानी, आशीष काबरा, प्रशान्त व्यास सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर नेत्रम संस्था, गीता भवन न्यास बड़नगर एवं डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज शासकीय नेत्र बैंक की ओर से नेत्रदान करने वाले सभी परोपकारी परिवारों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत ने कहा कि “नेत्रदान महादान है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में रोशनी लौट सकती है। मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन को रोशन करना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।” नेत्रम संस्था द्वारा नेत्रदान के प्रति जागरूकता एवं प्रेरणा का अभियान निरंतर जारी रहेगा।