सच्चे मन से जिसे तुम गुरु मान लो वही तुम्हारा गुरु हैं – मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज

इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। मोक्ष मार्ग के नेता और सज्जन पुरुषों को किसी सलाहकार की जरूरत नहीं होती, धर्म क्षेत्र में कोई सलाहकार नहीं होता। लेकिन राजनीति के नेताओं को सलाहकार की जरूरत होती है।
आचार्य विद्यासागर जी इस संसार में मोक्ष मार्ग के सबसे बड़े नेता थे उन्होंने कभी भी किसी से सलाह नहीं ली उन्होंने जो भी किया वह सब अपनी बुद्धि और विवेक से किया।वे सदैव संसार के सभी जीवो के लिए सुख की कामना करते थे और प्रत्येक जीव आत्मा को भगवान मानते थे।
गुरु का अर्थ है मलिक-स्वामी जिसके अभाव में तुम अपने को अनाथ और भाव में सनाथ महसूस करो वही गुरु है।और सच्चे मन से जिसे तुम गुरु मान लो वही तुम्हारा गुरु है। व्यक्ति अपनों से अपनों के बीच में अपनों से ही धोखा खाता है। दुनिया में ज्ञानचंद, रायचंद और हुकमचंद यह तीन व्यक्ति सबसे ज्यादा खतरनाक हैं, इनसे सावधान रहें। शेर कुत्तों से नहीं डरता दुनिया में कुत्ता ही एक मात्र ऐसा जीव है जो अपनी ही जाती के जीव को देखकर गुर्राता है, भोंकता है। जो भाई भाई पर गुर्राता हो वह भी वही है। दुनिया में जो दूसरों के सुख से सुखी है वह भिखारी है और जो अपनी मेहनत की रोटी खाऐ वह सुखी और खुशनसीब है।
दुनिया में कहीं भी
दुख और विफलता नहीं है इस शब्द को सोच को अपने मन से निकाल दो। धर्म सभा में अनेक स्थानों से पधारे श्रावकों एवं समाज के रितेश पाटनी मंयक जैन आकाश आलोक कोल अरविंद अखिलेश सोधीया संदीप जैन गिन्नी सचीनकोल अर्पित वाणी आदि समाज जन उपस्थित थे
धर्म सभा का संचालन श्रीमती सोनाली बगड़िया ने किया।

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