
रतलाम । परम पूज्य साध्वी श्री हेमप्रज्ञा जी म.सा. की 95 वी ओलीजी की कठीन आराधना के निमित्त सामूहिक सामायिक का विशेष आयोजन हनुमान रुंडी पर किया गया। आयोजन का लाभ जैनानंद युवक मंडल द्वारा लिया गया।
कार्यक्रम में नाट्य मंचन के माध्यम से पुण्य श्रावक की सामायिक और आधुनिक समय की सामायिक के बीच का अंतर बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाट्य प्रस्तुति ने सभी श्रावक-श्राविकाओं को आत्मशुद्धि का संदेश दिया। प पूज्य साध्वीजी श्री हेमप्रज्ञाश्रीजी म सा ने कहा कि जब मगध सम्राट श्रैणीक महाराजा के पूछने पर भगवान महावीर ने कहा कि तुम नरक मे जाओगे, यदि पुणिया श्रावक की एक सामायिक खरीद ले नरक टल जायेगा। लेकिन किसी भी तप साधना को खरीदा नही जा सकता।सामायिक केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा के निकट जाने और जीवन में समता,समाधी और संयम को ह्रदय मे उतारने का माध्यम है। सामायिक एक तपस्या है। प्रणिधान की शुद्धि के साथ सामायिक करने से नरकगति टल सकती है। सामायिक को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प ले। श्रीसंघ व पेढ़ी अध्यक्ष अशोक जैन चौटाला व राजेंद्र खाबीया ने बताया कि लगभग 500 श्रावक श्राविकाओं ने सामायिक की आराधना की। पूज्य साध्वीजी भगवंत ने एक वर्ष मे 95०० से अधिक सामायिक करने के पच्छ्काण दिलाये। कार्यक्रम में भक्ति, भावना और आत्मचिंतन का सुंदर संगम देखने को मिला। आराधको को प्रभावना जैनानंद युवक मंडल द्वारा की गई।