गुरु शिष्य के रिश्ते और कर्तव्य को सैल्यूट तीन बच्चों की जान बचाने वाले शिक्षक विजयसिंह राठौड़, प्रिंस मोदी को अदम्य साहस के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव से सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक देने का निवेदन किया – अनिल दसेड़ा

जावरा । पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव केबिनेट मंत्री चेतन काश्यप जावरा विधायक राजेंद्र पांडे कलेक्टर रतलाम से एक पत्र लिख कर मांग करी की त्रिमूर्ति कॉन्वेंट स्कूल के शिक्षक प्रिंस मोदी और विजय सिंह राठौर ने पैराडाइज वैली में पानी में डूब रहे बच्चों को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। दोनों ने तीन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन चौथे बच्चे को बचाने के प्रयास में स्वयं गहरे पानी में चले गए और उनकी मृत्यु हो गई।

बच्चों की जान बचाने वाले जावरा के दो शिक्षकों को मिले सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक
शिक्षक प्रिंस मोदी और विजय सिंह राठौर के साहस को मिले सर्वोच्च सम्मान

रतलाम के पैराडाइज वैली में 23 अगस्त को हुआ दर्दनाक हादसा हर किसी को झकझोर गया। पिकनिक पर गए बच्चों में से कुछ बच्चे अचानक गहरे पानी में डूबने लगे। उस समय जावरा के त्रिमूर्ति कॉन्वेंट स्कूल के शिक्षक प्रिंस मोदी और विजय सिंह राठौर ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगा दी।
दोनों शिक्षकों ने अदम्य साहस दिखाते हुए तीन बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके बाद जब एक अन्य बच्चा गहरे पानी में चला गया तो उसे बचाने के लिए दोनों शिक्षक दोबारा पानी में उतर गए। बच्चे को बचाने के प्रयास में दोनों स्वयं गहरे पानी में समा गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और सीपीआर देने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस हादसे में एक छात्र की भी मृत्यु हुई।
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य के रिश्ते और कर्तव्य की ऐसी मिसाल है, जिसमें दो शिक्षकों ने अपने विद्यार्थियों की जिंदगी बचाने के लिए अपना जीवन तक न्योछावर कर दिया। प्रिंस मोदी और विजय सिंह राठौर ने यह साबित कर दिया कि शिक्षक केवल शिक्षा देने वाला नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर अपने विद्यार्थियों की रक्षा के लिए स्वयं को संकट में डालने वाला मार्गदर्शक भी होता है।
ऐसे साहस और त्याग को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए। इसलिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग है कि शिक्षक प्रिंस मोदी और विजय सिंह राठौर को मरणोपरांत “सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक” से सम्मानित करने की अनुशंसा की जाए। साथ ही राज्य सरकार द्वारा दोनों शिक्षकों के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता, सम्मानजनक सरकारी सहायता तथा परिवार के भविष्य की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए।
इन दोनों शिक्षकों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा। जिन शिक्षकों ने अपने विद्यार्थियों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी, उनके साहस को सम्मान मिलना पूरे शिक्षक समाज और जावरा के लिए गौरव की बात होगी। मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि इस अदम्य साहस और मानवीय संवेदना को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दोनों शिक्षकों के नाम सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक के लिए प्रस्तावित किए जाएंगे।

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