सुधा वाणी : महाश्रमण सुधा सागरजी के प्रवचनांश

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) ।

  • जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं
  • गुरु वह होता है जो सब जानता है गुरु के पास शिष्य इसलिए आता है कि शिष्य के पास जो नहीं है उसे जानने और पाने आता है
  • कोइ स्वप्न में भी अपने गुरु एवं मां को कभी अज्ञानी मत मानना क्योंकि गुरु और मां सब जानते हैं।
  • जो पंच परमेष्ठी को मानते हैं लेकिन उनकी बात नहीं मानते ऐसे लोगों का कभी कल्याण नहीं होता।
  • साधु और गुरु में अंतर बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि साधु को नमोस्तु करो आशीर्वाद मिलेगा साधु को साधु की दृष्टि से एवं गुरु को गुरु की दृष्टि से देखो। गुरु को नमोस्तु करोगे तो तुम्हें आशीर्वाद के साथ गुरु की वसीयत भी मिलेगी जिस प्रकार पिता एक होता है चाचा अनेक हो सकते हैं लेकिन वसीयत पिता लिखते हैं चाचा नहीं उसी प्रकार साधु भीअनेक होते हैं लेकिन गुरु एक होता है। पिता की संपत्ति पर पुत्र का अधिकार होता है लेकिन गुरु की संपत्ति पर शिष्य का अधिकार होता है।
  • पिता स्वयं पिता नहीं बनता बेटा पिता बनाता है, साधु की दीक्षा होती है गुरु की नहीं साधु किसी को गुरु नहीं बनाते शिष्य साधु को गुरु बनाते हैं।

प्रवचन के पूर्व सेत वाल महिला मंडल ने नृत्य एवं भक्तिमय मंगलाचरण किया। डॉक्टर जैनेंद्र जैन मुक्ता राजेश जैन दद्दू एवं लोहारी वाला सेठ परिवार ने मुनि श्री के समक्ष रजत भक्ति कलश स्थापित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म सभा में धर्म सभा में रानी डोषी मुक्ता जैन सोनाली बागड़िया, हर्ष जैन, विपुल बाझल, भूपेंद्र जैन आकाश कोयला परिवार, अखिलेश अरविंद सोधिया, श्रुत जैन आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित थे। धर्म सभा का संचालन अनुराग जैन ने किया।

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