रतलाम, 02 सितंबर। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने बुधवार को कहा कि मनुष्य जीवन में जो भी होता है, वह कर्म के कारण होता है। समभाव से कर्म को तोडना तत्व है। तत्व को जाने और धर्म में रूची रखे। धर्म में रूची रखने वाले के कर्म टूटते है और अरूचि रखने वाला कर्म बांधता है।
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि जो भी मनुष्य भोगता है और जो घट रहा है या जो बीत गया, वे सब के सब उसके कर्म है। भोगते समय और बांधते समय सावधानी रखना जरूरी होता है। समभाव से कर्म भोगते है, तो नए कर्म नहीं बंधते है। लेकिन लोग आवेश में आ जाते है और कर्म भोगते हुए नए कर्म बांध भी लेते है। ज्ञानी कभी आवेश में नहीं आते, वे दृष्टाभाव से कर्म को देखते है और उसका आनंद लेते है। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी की हंसी-मजाक भी नहीं उडाएं, क्योंकि हंसी उडाने से भी कर्म बंधते है। किसी की सेवा नहंीं कर सको, तो कोई बात नहीं ,लेकिन हास्य करके मोहनीय कर्म का बंधन नहीं करना चाहिए।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि अनंत पुण्योदय से मनुष्य का भव मिलता है। इसमें भी यदि जिन शासन और जिनवाणी सुनने को मिले, उससे बडा सौभाग्य नहीं हो सकता। धर्म में रूची रखते हुए सबकों कर्म बंधन से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्म के कारण ही व्यक्ति रोता है। तत्व ज्ञान होगा, तो कर्म भी नहीं बंधेगे और धर्म में रूची रहेगी। इससे ही आत्मा को परमात्मा बनाया जा सकता है।
आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने प्रवचन किया। उनके साथ ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा, एवं श्री दर्शनमुनिजी मसा मंचासीन रहे। प्रवचन के दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन आयुष गंग द्वारा किया गया।