
(जन्माष्टमी : 4 सितंबर पर विशेष)
कृष्ण सिर्फ मुरली की तान नहीं,
ये इस जीवन का गहरा ज्ञान हैं।
वो अंधियारे में भी राह दिखाते,
हमारे उन कर्मों का सम्मान हैं।
आज धर्म बचाना हो तो लड़ना,
जब सत्य बचाना हो तो अड़ना।
यूं फल की चिंता छोड़ कर्म कर,
हाँ, यही कृष्ण का मंत्र है पढ़ना।
वो रहें सुदामा के सच्चे साथी,
धर्म हेतु अर्जुन के सारथी बने।
नीति, प्रेम और धर्म के प्रहरी,
हर एक युग में प्रासंगिक बने।
मंदिर में ही क्यों खोजें कृष्ण,
अपने कर्मों में हम उन्हें उतारें।
हम अन्याय के आगे झुकें नहीं,
सत्य की राह भी न छोड़ें सारे।
कृष्ण कोई बीती हुई कथा नहीं,
हरेक युग की जीवित चेतना हैं।
जहाँ धर्म के लिए साहस जागे,
उस कृष्ण की उपस्थिति है आगे।
संजय एम तराणेकर
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर-452011 (मध्य प्रदेश)
मो. 98260 25986
(स्व-रचित, मौलिक व अप्रकाशित)
संजय एम. तराणेकर,
(कवि, लेखक व समीक्षक)
इन्दौर-452011 (मध्यप्रदेश)
स्वरदूत : 98260-25986