

रतलाम। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन और उनका संदेश केवल किसी एक वर्ग, समाज अथवा कालखंड के लिए नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति के लिए प्रेरणा और संजीवनी के समान है। श्रीकृष्ण द्वारा प्रतिपादित कर्मयोग का सिद्धांत व्यक्ति को जीवन की विषम परिस्थितियों में भी संतुलित, कर्तव्यनिष्ठ और सकारात्मक बनाए रखने की शक्ति प्रदान करता है। यह विचार साहित्यकार एवं अधिवक्ता कैलाश व्यास ने दीनदयाल नगर स्थित एकीकृत डॉ. राधाकृष्ण उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
व्यास ने कहा कि जब व्यक्ति अपने प्रत्येक कार्य को ईश्वर का कार्य मानकर पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करता है, तब सामान्य से सामान्य कार्य भी पवित्र और असाधारण बन जाता है। इसके विपरीत जब व्यक्ति अपने कार्य की सफलता का संपूर्ण श्रेय अपनी बुद्धि, कौशल और सामर्थ्य को देने लगता है, तब उसके भीतर अहंकार की भावना उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, कार्य में अपेक्षित सफलता न मिलने पर व्यक्ति तनाव, निराशा और अवसाद से घिर सकता है।
उन्होंने कहा कि भगवद्गीता का कर्मयोग व्यक्ति को इन दोनों स्थितियों से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। जब हम अपने कर्म और उसके परिणाम ईश्वर को समर्पित कर देते हैं, तब सफलता अहंकार का कारण नहीं बनती और असफलता निराशा का सबब नहीं बनती। व्यक्ति शांत चित्त, प्रसन्न मन और निष्काम भाव से अपने कर्तव्य का पालन करता हुआ ईश्वर की कृपा का पात्र बनता है। यही श्रीकृष्ण के संदेश की सार्वकालिकता और महानता है।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि डाइट के पूर्व प्राचार्य डॉ. नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन उत्कृष्ट और आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देता है। उनका जीवन प्रारंभ से ही अनेक कठिनाइयों, संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने प्रत्येक परिस्थिति का धैर्य, बुद्धिमत्ता और दृढ़ संकल्प के साथ सामना किया। उनके जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि कठिन परिस्थितियां व्यक्ति की प्रगति में बाधा नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व को मजबूत बनाने का अवसर होती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे श्रीकृष्ण के जीवन से सत्य, साहस, कर्तव्यनिष्ठा मित्रता, करुणा और संघर्षशीलता जैसे गुणों को अपने जीवन में आत्मसात करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राकेश पोरवाल ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति और दर्शन में भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व अत्यंत व्यापक और बहुआयामी है। वे एक आदर्श पुत्र, मित्र, मार्गदर्शक, कूटनीतिज्ञ, योद्धा और महान दार्शनिक के रूप में मानव जीवन के विविध पक्षों को दिशा प्रदान करते हैं। विशेष रूप से युवाओं के लिए उनका जीवन आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रेरक स्रोत है ।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के प्राचार्य श्री गोपाल वर्मा एवम अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन के साथ किया गया।प्राचार्य श्री गोपाल वर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का परिचय कराया तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और संस्कारों के विकास का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। भारतीय संस्कृति के महान आदर्शों और महापुरुषों के जीवन से विद्यार्थियों को परिचित कराना आवश्यक है, ताकि वे ज्ञान के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों से भी समृद्ध बन सकें। समारोह में विद्यालय परिवार के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ सहभागिता की।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में श्री पंकज शर्मा सर ने आभार प्रदर्शन किया, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती मधु परिहार मैडम ने किया।