श्रीकृष्ण ने अर्जुन को माध्यम बनाकर प्राणीमात्र के जीवन उन्नयन का दिया संदेश

रतलाम। गीता ज्ञान, भक्ति और कर्म का समवेत गान है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को माध्यम बनाकर गीता का संदेश प्राणीमात्र के जीवन के उन्नयन के लिए ज्योतिपुंज की तरह प्रकट किया। श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा के साथ मित्रता और प्रेम को सर्वोच्च शिखर पर स्थापित किया, वहीं दुर्योधन और कंस जैसे दुष्टों को उनके कर्मों का यथोचित फल मिलने का संदेश भी दिया।
यह बात साहित्यकार एवं अधिवक्ता कैलाश व्यास ने श्री नित्यानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धोसवास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित प्रबुद्ध जन व्याख्यान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी उत्कृष्ट संदेश देती है। हजारों वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण ने जल, जंगल, प्रकृति और जलवायु के संरक्षण तथा प्रकृति के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राकेश पोरवाल ने कहा कि शस्त्र की शिक्षा भगवान श्रीराम से और शास्त्र का ज्ञान भगवान श्रीकृष्ण से प्राप्त किया जा सकता है। श्रीकृष्ण का प्रत्येक वचन मानव जीवन को श्रेष्ठ और उन्नत बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था प्राचार्य कमल सिंह राठौड़ एवं अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया। अतिथियों का स्वागत कमल सिंह व इसरार खान ने किया। स्वागत उद्बोधन में प्राचार्य कमल सिंह राठौड़ ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का गहराई से अध्ययन किया जाए तो प्रत्येक लीला के पीछे एक गहन दार्शनिक संदेश दिखाई देता है। ये संदेश जीवन के प्रत्येक चरण में मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं।
मुख्य अतिथि के उद्बोधन के बाद उपस्थित श्रोताओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, गीता के संदेश तथा उनके आदर्शों से जुड़े प्रश्न पूछे। कैलाश व्यास ने प्रश्नों के उत्तर देकर श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम का संचालन _सीमा चौहान ने किया तथा आभार रमा टिलवानी ने व्यक्त किया।