माया के अधीन जीव, भगवान के अधीन माया : विशोकानंद जी भारती

अखंड ज्ञान आश्रम में धूमधाम से मनाया कृष्ण जन्मोत्सव, भजनों पर झूमे श्रद्धालु

रतलाम 4 सितंबर । स्वामी ज्ञानानंद मार्ग, सैलाना बस स्टैंड स्थित श्री अखंड ज्ञान आश्रम में आयोजित दिव्य चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को निर्वाणी अखाड़ा पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी श्री श्री 1008 विशोकानंद जी भारती के सानिध्य में प्रातःकाल कठोपनिषद का स्वाध्याय एवं सायंकाल श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा एवं प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ लिया।

कृष्ण जन्म के साथ खुल गईं कारागार की हथकड़ियां
श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद जी भारती ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कारागार में वासुदेव और देवकी की हथकड़ियां स्वतः खुल गईं तथा महामाया के प्रभाव से वहां मौजूद सभी प्रहरी निद्रा में चले गए। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में महामाया की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है—
“या देवी सर्वभूतेषु निद्रा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
आचार्यश्री ने कहा कि जीव माया के वश में रहता है, जबकि माया भगवान के अधीन होती है। भगवान की लीला में महामाया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जब कंस ने देवकी की आठवीं संतान को शिला पर पटकने का प्रयास किया तो वह कन्या उसके हाथ से छूटकर आकाश में प्रकट हुई और देवी दुर्गा के रूप में प्रकट होकर कंस को चेतावनी दी कि जिस कृष्ण से उसे भय है, उसका जन्म हो चुका है और कंस उसका वध नहीं कर पाएगा।

वासुदेव बने, कृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना पार पहुंचे
कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आश्रम में उत्साह और भक्ति का वातावरण देखते ही बना। आचार्यश्री ने भजनों की प्रस्तुति दी। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। वासुदेव द्वारा बालकृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना पार करने की झांकी प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी सहित आचार्यश्री के समक्ष समर्पित किया गया।
भजनों की मधुर प्रस्तुति से पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय हो गया। भगवान के नाम की मस्ती में श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य कर कृष्ण जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। वातावरण में चारों ओर “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंजते रहे। इसके पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
प्रसाद वितरण में शांतिलाल राठौड़ एवं भोले स्वर्गीय फूलाबाई रामपाल पापटवाल परिवार की ओर से सहयोग किया गया। आयोजन में आश्रम के संतगण सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित रहे।

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