रतलाम । प्रभु राठौड़ ने कहां पिछले वर्ष जब कोरोना महामारी की शुरुआत हुई तभी से संपूर्ण भारत में आयुष डॉक्टर्स ने अपनी पूर्ण क्षमता के साथ कार्य करते हुए महामारी की पहली लहर से निपटने में सहयोग किया जिसके फलस्वरूप भारत के नागरिक सुरक्षित रहे।
इस आशय का एक पत्र मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव प्रभु राठौर ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई सुझाव दिए हैं, उन्होंने कहा कि हमारे देश में टोटल एमबीबीएस डॉक्टर की संख्या 12.30 लाख है जो कि डब्ल्यूएचओ के मापदंड के से बहुत कम है हमारे यहां आयुष डॉक्टरों की संख्या 8 लाख के करीब है। भारत में एमबीबीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बी यू एम एस, बीडीएस कोर्स है जो सभी लगभग 5.5 वर्ष के हैं। इसी प्रकार पिछले वर्ष संविदा पर आयुष डॉक्टर को रखा गया एवं सेंपलिंग, आइसोलेशन, मेडिकेशन कॉल सेंटर, आदि पर इनकी ड्यूटी लगाई गई परंतु जब महामारी का प्रभाव कम हुआ तब इन लोगों को बाहर कर दिया गया। जो कि अनुचित एवं अमानवीय है।
श्री राठौर ने कहा कि इस वर्ष जब कोरोना की दूसरी लहर आई तब फिर से संविदा पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाल दिया गया है। इनके साथ वेतन में भी भेदभाव किया जाता है। एमबीबीएस डॉक्टर को 60,000 रू. एवं आयुष डॉक्टर को मात्र 25,000रू प्रति माह में संविदा पर रखा जाता है जब किसी कोर्स की समय अवधि समान है तो उसका मानदेय भी समान होना चाहिए।
श्री राठौर का कहना है कि शासन को जरूरत होने पर इनको उपयोग किया जाता है और बाद में बिना डिग्री के लोगों एवं बंगाली डाॅक्टर की तरह आयुष डॉक्टर को झोला छाप बोल कर के उनके क्लीनिक पर छापे डाले जाते हैं। इसी प्रकार महाराष्ट्र एवं दिल्ली सरकार ने आयुष डॉक्टरों को ट्रीटमेंट की परमिशन दे रखी है जिससे वहां पर डॉक्टर की कमी नहीं है इसे मध्य प्रदेश सहित देश के दूसरे राज्यों के लिए लोकसभा एवं राज्यसभा से कानून पास करने का निर्णय लेकर एवं राज्यो को भी निर्देशित करते हुए आयुष डॉक्टरो को सेवा प्रदान करने का अवसर अविलंब सुनिश्चित करना चाहिए। जिससे ज्यादा से ज्यादा जनता को डिग्री धारी डॉक्टरों की सेवाएं प्राप्त हो सके एवं महामारी के अलावा भी ग्रामीण क्षेत्र की जनता जो डाॅक्टरो की कमी से जूझ रही है को राहत मिलेगी। ऐसे समय में अगर प्रधानमंत्री जी आप निर्णय नहीं लेंगे तो फिर कब लेंगे मेरा भारत की जनता की ओर से एवं आयुष डॉक्टर व उनके परिवार की ओर से निवेदन है कि आप यह निर्णय करकें उन्हे सेवा का एक अवसर प्रदान करे ताकि इनके परिवार वालो ने इनके माता पिता ने जो कष्ट सहकर लाखो रूपये खर्चा करके जो इनको पढ़ाया लिखाया है वह सार्थक हो सके।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव प्रभु राठौड़ ने कहा कि अगर आयुष डॉक्टर एलोपैथी और बेसिक ट्रीटमेंट नहीं कर सकते हैं तो शासन भी उनसे कोविड-19 काल में सेवा नहीं करा सकता है सारे निजी नर्सिंग होम एवं बड़े हॉस्पिटल जैसे अपोलो, मेदांता आदि में आयुष डॉक्टर ड्यूटी करते हैं, ओपीडी से लगाकर आईसीयू तक आयुष डॉक्टर ही इलाज कर रहे हैं इस पर भी तुरंत रोक लगानी चाहिए अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो जो आयुष डॉक्टर प्राइवेट क्लीनिक चला रहे हैं उन्हें भी अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। संपूर्ण भारत आज चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है ऐसी परिस्थिति में आयुष डॉक्टर को ट्रेनिंग देकर इनका उपयोग जनता की भलाई में किया जा सकता है
2 मई 2021 को आप माननीय प्रधानमंत्री जी ने एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्र एवं नर्सिंग के छात्रों का उपयोग कोविड-19 में करने का फैसला किया है परंतु उसमें आयुष डॉक्टरों का जिक्र नहीं है इतनी बड़ी महामारी होने पर भी अगर यह आयुष डॉक्टर काम के नहीं है तो सरकार को यह कोर्स तुरंत बंद कर देना चाहिए और जितने भी आयुष डाॅक्टर की शिक्षा के संस्थान/काॅलेज है उन पर भी प्रतिबंध लगा देना चाहिए ताकि गरीब लोग या अनभिज्ञ लोग अपने परिवार जनों का इन कॉलेजों में एडमिशन ना कराएं और उनका भविष्य खराब ना करे। महोदय साथ ही इस ओर भी आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगा कि चाईना से डाॅक्टरी करके आने वालो को ईलाज की अनुमति दी जा रही है, लेकिन हमारे अपने स्वदेशी आयुष डाॅक्टरो को झोला छाप कहा जा रहा है, जबकि यहां के और चाईना के वातावरण में जमीन आसमान का अंतर है।
आज कोरोना वायरस का तांडव अगर कही सबसे ज्यादा है तो वह ग्रामीण क्षेत्र है। पूरे भारत में पंचायत स्तर पर कोविड-19 के सेंटर खोलने की भी आवश्यकता है। कोविड सेंटर खोलने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में भवनों की कमी नहीं है गांव के लोगो की समाज की धर्मशाला, ग्राम पंचायत भवन, स्कूल भवन, छात्रावास भवन, निजी स्कूल भवन उपलब्ध है। अगर सही से व्यवस्था होती है तो इस बीमारी से ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से जीता जा सकता है। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष डॉक्टर पर ग्रामीण जनता का पूरा भरोसा है क्योंकि आयुष डॉक्टर हमेशा से अधिक से अधिक ग्रामीण क्षेत्र की जनता की सेवा करता रहा है इसलिए शासन द्वारा आयुष डॉक्टर की स्थाई स्थानीय नियुक्ति कर दी जाए जिससे ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य सेवा का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना ना पड़ेगा।
अतः माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन है एवं देश के सभी राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री जी को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है कि आयुष डाॅक्टरो की काबिलियत का सही उपयोग कर उन्हे भी देश के ऊपर आई इस विपदा में देश सेवा का अवसर प्रदान करने की कृपा करें।