16 दिसंबर 2026 को जयपुर में इतिहास रचेगा, श्रुतसंवेगी महाश्रमण पूज्य मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज के कर-कमलों से होंगी तीन भव्य जैनेश्वरी दीक्षाएं

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । दो हजार छब्बीस का साल गुरु भक्तों, मुनि भक्तों और जयपुर पिंक सिटी वालों के लिए अत्यंत खास रहने वाला है। जैन धर्म की गौरवमयी परम्परा में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है, जब 16 दिसंबर 2026 को जयपुर (राजस्थान) की पावन धरती पर श्रमंण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य चर्या शिरोमणि आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के कुल गौरव प्रयाग शिष्य परम पूज्य श्रुतसंवेगी महाश्रमण पूज्य मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य एवं अपने ही कर-कमलों से प्रथम बार भव्य जैनेश्वरी दीक्षाओं का मंगल प्रसंग संपन्न होगा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी गुरुदेव के आशीर्वाद से यह दीक्षा महोत्सव इस दशक का सबसे बड़ा महामहोत्सव होगा। महाश्रंमण मुनि श्री आदित्य सागर जी से शिक्षित इन तीन बालब्रह्मचारियों का होगा आत्म-कल्याण का महाप्रस्थान जेनेश्वरी मुनि दीक्षा इस पावन अवसर पर अपने जीवन को संयम, त्याग और आत्मकल्याण के पथ पर समर्पित करते हुए –
- बालब्रह्मचारी अतिशय भैया जी,
- बालब्रह्मचारी विशाल भैया जी,
- बालब्रह्मचारी रोहित भैया जी
जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार करेंगे। प्रारंभ में तीन दीक्षाएं सुनिश्चित हुई हैं, आगे और भी दीक्षाएं हो सकती हैं। दद्दू ने कहा कि गुरु सान्निध्य में होगा दीक्षा महोत्सव -*
सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज जैसे महापुरुष के शिष्य श्रुत संवेगी पूज्य मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज संसघ की सन्निधि पूरे कार्यक्रम में रहेगी और उन्हीं के करकमलों पावन निश्रा में यह दीक्षा सम्पन्न होगी। यह विशाल आयोजन आदित्य प्रेरणा मंच, जयपुर समर्पण समूह भारत के साथ मिलकर सम्पन्न किया गया है। दीक्षा प्रदाता गुरु देव ने कहा की 6 दिसंबर जयपुर में मंगल प्रवेश पश्चात
13 दिसंबर – श्री भक्तामर विधान
14 दिसंबर – दीक्षार्थी भाइयों की भव्य बिनौली
15 दिसंबर – गणधर वलय विधान
16 दिसंबर जेनेश्वरी दीक्षा महा-महोत्सव । गुरु देव ने आयोजकों को संबोधित करते हुए कहा कि “सौ पिच्छी हो चाहे दो सौ पिच्छी हो, जयपुर वालों का दिल बड़ा है और जयपुर बहुत बड़ा है। सुई की नोक से लेकर हवाई जहाज बनाने तक का काम आदित्य प्रेरणा मंच संभालेगा। जो सच्चे गुरु भक्त हैं वो अपने आप दीक्षा महोत्सव आएंगे।
यह केवल दीक्षा का अवसर नहीं, बल्कि संयम, त्याग, तप और आत्मकल्याण की उस महान परम्परा का उत्सव है, जो जिनशासन की दिव्य शिक्षाओं को जीवंत बनाती है। सभी गुरु भक्तों से आह्वान किया गया है कि वे इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनें। और नमोस्तु शासन जयवंत हो गुंजायमान कर अपने जीवन को धन्य करें।