
रतलाम,10 सितंबर। धर्मपत्नी किसे कहते है ? जो धर्म में सहायक हो, वही धर्मपत्नी है। धर्म का पालन कराने मे ंधर्मपत्नी का ही सहयोग रहता है। धर्म को जानने वाली महिला ही जानती है कि जीवन में साधना जरूरी है, ना कि भोग में जीना जरूरी है। भोग नारी चाहती है, जबकि धर्मपत्नी तो धर्म ही चाहती है।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। वे पर्वाधिराज पर्यूषण के तीसरे दिन मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार मे विशाल धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने धर्ममय जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म में पत्नी की अहम भूमिका होती है। धर्मपत्नी धर्म में स्थिर करती है। वो पूरे दिन घर का सारा कार्य संभालती है। सुबह से रात तक बिना बोले खुशी-खुशी सारे कर्तव्य पूरे करती है। पति के साथ बच्चों के कर्तव्य भी पूरे करती है, लेकिन कोई पगार नहीं लेती। सम्मान की अभिलाषा भी नहीं रखती है। उसका धर्म स्वरूप विराट होता है। सच में नारी यदि अनुशासित मर्यादा में रहती है, तो घर को स्वर्ग बना देती है।
प्रवर्तकश्री ने मां के हाथ से भोजन करने की सीख देते हुए कहा कि मां के हाथ के भोजन में कभी विकार नहीं होते। मां के हाथ का भोजन अमृत के समान होता है। मां कभी बच्चों का बुरा नहीं चाहती, वह तो हमेशा मंगल ही चाहती है। उन्हांेने कहा कि हर व्यक्ति को धर्म में जीना चाहिए। धर्म में जीने से कर्म निर्झरा होती है। हमारा धर्म क्रोध नहीं है, अपितु क्षमा ही है। धर्मी होने के लिए क्रोध के साथ मोह-माया, लोभ, राग-द्वेष आदि सभी कषायों से बचना जरूरी है। मनुष्य का सौभाग्य तभी जागता है, जब वह धर्म में जिएगा।
धर्मसभा में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा ने पर्यूषण पर्व का महत्व बताते हुए तप-आराधना करने पर बल दिया। इस मौके पर कई तपस्वियों ने अलग-अलग तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। धर्मसभा में प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा एवं सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा मंचासीन रहे। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। प्रदेश एवं देश विभिन्न स्थानों से गुरूभक्तों ने भी रतलाम पहुंचकर धर्मलाभ लिया। धर्मसभा का संचालन आयुष गंग द्वारा किया गया।