श्री महावीर जी क्षेत्र में अतिक्रमण का आरोप, दिगंबर जैन समाज चिंतित

“आज तक दिगंबर समाज ने किसी दूसरे के क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया, लेकिन दिगंबरों के क्षेत्र में प्रवेश करने वालों की संख्या लाखों में” – कौन कर रहा है अतिक्रमण?

श्री महावीर जी / इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। राजस्थान के प्रसिद्ध सिद्ध “महावीर जी के क्षेत्र है… वहाँ भी घुस गए!” यह बात श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य चर्या शिरोमणि आचार्य विशुद्ध सागर जी ने कही कि आज तक दिगंबर जैन समाज ने किसी दूसरे संप्रदाय के तीर्थ क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया, न ही वहाँ कोई अपना हक जताया, लेकिन दिगंबरों के मूल क्षेत्रों में प्रवेश करने और अतिक्रमण करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन लाखों में पहुंच गई है। सोचिए… अतिक्रमण कौन कर रहा है?
श्री महावीर जी राजस्थान का विश्व प्रसिद्ध दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र है। मान्यता है कि यहाँ भगवान महावीर की प्राचीन प्रतिमा भू-गर्भ से प्रकट हुई थी। यह क्षेत्र अनादि काल से दिगंबर आम्नाय का रहा है, जहाँ दिगंबर पद्धति से पूजा-प्रक्षाल होती है।
पिछले कुछ वर्षों से यहाँ दर्शन व्यवस्था, पूजा पद्धति और प्रबंधन को लेकर विवाद सामने आ रहे हैं। आरोप है कि यहाँ श्वेतांबर परंपरा की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे मूल दिगंबर स्वरूप में बदलाव की आशंका बढ़ गई है। इसी को लेकर समाज में कहा जा रहा है कि “वहाँ भी घुस पेठ की कोशिश जारी है।
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू* ने कहा –

“दिगंबर जैन समाज अत्यंत सहिष्णु समाज है। इतिहास गवाह है कि दिगंबर समाज ने कभी भी श्वेतांबर समाज के किसी भी तीर्थ जैसे – पालीताणा, सम्मेत शिखरजी के श्वेतांबर पक्ष के मंदिरों, माउंट आबू आदि में जाकर अपना दावा नहीं किया, न ही वहाँ अपनी परम्परा थोपी।
लेकिन दुख की बात है कि दिगंबरों के सर्वोच्च तीर्थ – श्री गिरनार जी, श्री महावीर जी, बाहुबली श्रवणबेलगोला के आसपास के क्षेत्र, और कई अतिशय क्षेत्रों में लगातार दूसरे पक्ष द्वारा प्रवेश और अतिक्रमण के प्रयास हो रहे हैं। यह केवल जमीन का अतिक्रमण नहीं, यह हमारी संस्कृति, पूजा पद्धति और आम्नाय का अतिक्रमण है।”

दद्दू ने आगे कहा कि – “श्री महावीर जी हमारा प्राण है। वहाँ दिगंबर पद्धति ही रहनी चाहिए। यदि वहाँ भी विकल्प खत्म हो जाएगा, तो दिगंबर समाज कहाँ जाएगा? यह चिंता हर दिगंबर जैन के मन में है।”भारत वर्षीय दिगंबर जैन समाज की मांग

  1. श्री महावीर जी क्षेत्र का मूल दिगंबर स्वरूप अक्षुण्ण रखा जाए।
  2. प्रबंधन में दिगंबर आम्नाय की पूजा-पद्धति, प्रक्षाल और परम्पराओं से कोई छेड़छाड़ न की जाए।
  3. भारत सरकार, पुरातत्व विभाग और राजस्थान सरकार ऐसे प्राचीन दिगंबर तीर्थों को संरक्षित तीर्थ के रूप में घोषित करे।
  4. दोनों संप्रदायों में आपसी प्रेम बना रहे, लेकिन एक-दूसरे के मूल तीर्थों के स्वरूप से छेड़छाड़ न हो – “जियो और जीने दो” का सिद्धांत लागू हो। राष्ट्रीय जिन शासन संघ के राकेश गोहिल,मंयक जैन ने कहा कि
    “यह अतिक्रमण बंद होना चाहिए” और “हम अपने तीर्थों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।”
    जिन शासन एकता संघ ने सभी दिगंबर जैन संगठनों एवं समाज से एकजुट होकर शांतिपूर्ण और वैधानिक तरीके से अपने तीर्थों की रक्षा की अपील की है।

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